जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा : रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए), अपार्टमेंट ओनर एसोसिएशन (एओए) को मान्यता का रास्ता साफ होने के साथ ही विरोध भी शुरू हो गया है। फेडरेशन ऑफ आरडब्ल्यूए ने प्राधिकरण की ओर से सौंपे जाने वाले किसी कार्य को ग्रहण करने से इन्कार कर दिया। बुधवार को फेडरेशन की बैठक में आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि प्राधिकरण अपनी जिम्मेदारी को उन पर डालने का प्रयास कर रहा, इसे वह स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने प्राधिकरण के फैसले का विरोध करने का निर्णय लिया।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की मंगलवार को 118वीं बोर्ड बैठक में आरडब्ल्यूए, एओए को मान्यता देने के प्रस्ताव पर मुहर भी लग गई। इसके लिए आरडब्ल्यूए व एओए लंबे समय से प्रयासरत थी। प्राधिकरण ने मान्यता के साथ आरडब्ल्यूए, एओए के अधिकार भी तय कर दिए हैं। प्राधिकरण ने आरडब्ल्यूए को कूड़ा निस्तारण, सामुदायिक केंद्रों का प्रबंधन एवं रखरखाव, पार्क का प्रबंधन एवं रखरखाव, हरित पट्टी का रखरखाव समेत अन्य अधिकार दिए हैं।

इसे लेकर विरोध भी शुरू हो गया है। जो आरडब्ल्यूए, एओए प्राधिकरण से मान्यता की मांग करती रहीं, अब वहीं इसके विरोध में खड़ी हो गई है। फेडरेशन की बैठक में आरडब्ल्यूए के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि प्राधिकरण अधिकारी शहर के ढांचे को बिगाड़ना चाहते हैं। अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। इसलिए आरडब्ल्यूए पर जिम्मेदारियों का बोझ डालने का प्रयास किया जा रहा है। आरडब्ल्यूए के पास कोई बजट नहीं है। वह करोड़ों रुपये के विकास कार्यो को कैसे करेंगे।

डेल्टा दो आरडब्ल्यूए अध्यक्ष अजब सिंह ने कहा कि वह अतिरिक्त कार्यभार वहन करने को तैयार नहीं हैं। डेल्टा एक अध्यक्ष ऋषिपाल ने कहा कि आरडब्ल्यूए सेक्टर के लोग के सहयोग से वर्षो से सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रही है। प्राधिकरण ने इसमें सहयोग नहीं किया। सेक्टरवासियों पर और ज्यादा बोझ डालना संभव नहीं है। पी थ्री सेक्टर के महासचिव परितोष भाटी ने कहा कि प्राधिकरण अपनी जिम्मेदारी से भाग रहा है। शहर के ढांचे को तहस-नहस करने का प्रयास किया जा रहा है। फेडरेशन उपाध्यक्ष आलोक नागर ने कहा कि सेक्टर के बढ़े ढांचे को संभालना आरडब्ल्यूए के लिए संभव नहीं है। वहीं म्यू तीन सेक्टर के अध्यक्ष कर्मवीर फौजी ने कहा कि प्राधिकरण ने हाल में सेक्टर में 30 लाख से अधिक के कार्य कराए हैं। आरडब्ल्यूए को इतने बढ़े बजट की व्यवस्था करना संभव नहीं है।

आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों ने कहा कि प्राधिकरण लीजरेंट के अलावा आवंटियों से मोटा ट्रांसफर चार्ज लेता है। यह रकम शहर के विकास के लिए है। अगर प्राधिकरण शहर की जिम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं है तो संपत्ति को फ्री होल्ड कर नगर निगम का गठन हो, ताकि प्रदेश सरकार से शहर के विकास के लिए धन आवंटित हो सके। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण ने अगर अपना फैसला थोपने का प्रयास किया तो कोर्ट के साथ आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। बैठक में फेडरेशन अध्यक्ष देवेंद्र टायगर, ब्रजेश भाटी, मनीष भाटी, दीपक कुमार भाटी, सुरेंद्र सिंह राणा, सतीश भाटी, आलोक नागर, कैलाश भाटी, विजय शर्मा, सुधीर त्यागी, सतीश शर्मा, वीरेश बैंसला, धर्मवीर नागर मौजूद थे।

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