आपका भी बच्चा रील्स देखता है तो हो जाएं सावधान, मैथ्स की समझ हो रही खत्म; लिखना भी भूल रहे
Reels Scrolling Addiction: रील्स और यूट्यूब शॉर्ट्स की लत बच्चों की लिखने की क्षमता और गणित की समझ को प्रभावित ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य- AI Generated
HighLights
रील्स की लत से बच्चों की लिखाई हो रही खराब।
गणित की समझ और एकाग्रता में आ रही कमी।
प्रति माह 15-20 मामले आ रहे सामने।
आशीष चौरसिया, ग्रेटर नोएडा। Reels Scrolling Addiction: रील्स की स्क्रॉलिंग और यूट्यूब शॉर्ट्स की लत बच्चों को लिखना भुला रही है, साथ ही गणित की समझ को भी धीरे-धीरे खत्म कर रही है। मनोविज्ञानी और मनोचिकित्सकों का कहना है कि वर्तमान में ऐसे बच्चे आ रहे हैं, जिनकी लिखी हुई हैंडराइटिंग पढ़ना मुश्किल हो रहा है।
इसे डिसप्रैकसिया कहा जाता है, जबकि गणित की समझ में कमी को डिसकैलकोलिया कहा जाता है। लगातार स्क्रॉलिंग से दिमाग में कई विचार आते हैं, लेकिन कोई एक पर ध्यान नहीं टिकता। गणित और लिखाई दोनों के लिए फोकस की आवश्यकता होती है।
हर महीने पहुंच रहे 15 से 20 मामले
जीबीयू के मनोविज्ञानी डॉ. आनंद प्रताप सिंह ने बताया कि उनके पास प्रति महीने लगभग 15 से 20 बच्चे ऐसे आ रहे हैं, जिन्हें रील्स स्क्रॉल करने और यूट्यूब के शॉर्ट्स वीडियो देखने की लत लग चुकी है।
इसके कारण इन बच्चों में लिखने की क्षमता कम हो रही है और उनकी हैंडराइटिंग भी खराब हो रही है, जिससे पढ़ना मुश्किल हो रहा है। स्क्रीन पर केवल अंगूठा चलता है, जिससे पेंसिल पकड़ने और अक्षरों की शेप बनाने की फाइन मोटर स्किल कमजोर हो रही है।
डॉ. सिंह ने बताया कि 15 सेकंड की रील ने बच्चों का ध्यान केंद्रित करने का समय 8 से 10 सेकंड कर दिया है। गणित में सवाल पढ़ने और समझने में तीन मिनट लगते हैं, जबकि बच्चे 30 सेकंड में जवाब चाहते हैं। जवाब न मिलने पर हताश होकर छोड़ देते हैं। मोबाइल फोन के अधिक उपयोग से बच्चों में स्पेलिंग गलत करने की समस्या भी बढ़ रही है, क्योंकि ऑटो स्पेलिंग करेक्ट उनकी सोच को कमजोर कर रहा है।
