जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा : भीषण गर्मी और उमस ने बिजली की मांग में जबरदस्त इजाफा किया है। बिजली की अधिकतम मांग 420 मेगावाट पहुंच चुकी है। इसमें सबसे अधिक मांग घरेलू उपभोक्ताओं की है। औद्योगिक, संस्थागत व कॉमर्शियल उपभोक्ताओं की मांग अभी कम बनी हुई है।

लॉकडाउन के दौरान सभी तरह की गतिविधियां बंद होने से इस साल बिजली की मांग रिकार्ड स्तर पर कम दर्ज हुई। बिजली की मांग सौ मेगावाट से भी कम रही। गर्मी न बढ़ने के कारण कूलर, एसी का उपयोग नहीं बढ़ा था। अब हालात पूरी तरह से बदल गए हैं। गर्मी व उमस से लोग बेहाल हैं। गर्मी से राहत के लिए लोग एसी, कूलर का जमकर उपयोग कर रहे हैं। इससे बिजली की मांग इस हफ्ते अधिकतम 420 मेगावाट के स्तर पर पहुंच गई। मांग में दिनों दिन बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

यह हालात तब हैं, जबकि अनलॉक के बावजूद औद्योगिक इकाइयों में पूरी क्षमता के साथ कार्य शुरू नहीं हुआ है। स्कूल-कॉलेज बंद होने से संस्थागत मांग भी निम्न स्तर पर है। छात्रों के घर चले जाने के कारण हॉस्टल भी खाली हैं।

कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने को बाजार के खुलने एवं बंद होने की समय सीमा का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। आठ बजते ही बाजार में दुकानें, मॉल बंद हो जाते हैं। इसलिए कॉमर्शियल उपभोक्ताओं की मांग भी रात में नहीं है।

घरेलू उपभोक्ताओं के कारण ही बिजली की अधिकतम खपत बनी हुई है। उमस बढ़ने से इसमें और इजाफा होने का संभावना है। बिजली की मांग 400 मेगावाट से अधिक पहुंच चुकी है। गर्मी व उमस के कारण मांग में इजाफा हुआ है। घरेलू उपभोक्ताओं में बिजली की अधिकतम खपत दर्ज की जा रही है।

-सारनाथ गांगुली, वीपी एनपीसीएल

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