जागरण संवाददाता, नोएडा :

जिले में परिवार नियोजन के लिए पीपीआइयूसीडी (पोस्ट पार्टम इंट्रायूटेराइन कोंट्रासेप्टिव डिवाइस) अपनाने वाले दंपत्तियों की संख्या बढ़ रही है। इससे दंपत्तियों द्वारा परिवार नियोजन को प्राथमिकता देने के संकेत मिल रहे हैं। जिले में वर्ष 2019-20 में 1716 महिलाओं ने प्रसव के बाद पीपीआइयूसीडी लगवाकर बच्चों में अंतर रखने का निर्णय लिया है। जबकि 2018-19 में यह संख्या 944 थी।

एसीएमओ डॉ. वीबी ढाका के मुताबिक पीपीआइयूसीडी बच्चों में अंतर रखने की एक विधि है। जिसमें महिला के प्रसव के बाद 24 घंटे के अंदर गर्भाशय में यह डिवाइस लगाई जाती है। बच्चों में तीन वर्ष या तीन वर्ष से अधिक समय का अंतर रखने के लिए इस विधि का उपयोग किया जाता है। इससे मां और बच्चा दोनों के स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं पड़ता। जब दंपती को अगले बच्चे की इच्छा हो तो वह यह डिवाइस गर्भाशय से निकलवा भी सकते हैं। बताया कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग परिवार नियोजन के विभिन्न तरीके अपनाने के लिए लोगों को जागरूक कर रहा है। इनमें गर्भ निरोधक गोलियां, पीपीआइयूसीडी, आइयूसीडी, पीएआइयूसीडी कॉपर टी आदि शामिल है। इसके तहत स्वास्थ्य विभाग महिलाओं को पीपीआइयूसीडी लगाने वाली आशा बहन और स्टाफ नर्स को 150-150 रुपये प्रोत्साहन राशि के तौर पर देता है। प्रोत्साहन राशि मिलने के बाद आशा व नर्सो ने उत्साह के साथ काम करना शुरू किया, जिससे अच्छे परिणाम सामने आए हैं। इस समय जिले में लगभग 570 आशा हैं।

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प्रदेश में चौथे स्थान पर जिला

परिवार नियोजन के इस माध्यम से गौतमबुद्धनगर का प्रदेश में चौथा स्थान है। बच्चों में अंतर रखने के लिए प्रसव के बाद पीपीआइयूसीडी लगवाना बेहतर साधन है। इसे लगवाने के बाद महिलाओं की नियमित जांच भी की जाती है और आशा व एएनएम भी समय-समय पर महिलाओं को परामर्श देने के लिए पहुंचती है।

Posted By: Jagran

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