अर्पित त्रिपाठी, ग्रेटर नोएडा :

नोटा यानी उपरोक्त में से कोई भी नहीं, उत्तर प्रदेश के 2017 विधान सभा चुनाव में पहली बार इलेक्ट्रानिक वोटिग मशीन में शामिल हुआ था। पहली बार में ही गौतमबुद्ध नगर की तीनों सीटों में ये कई प्रत्याशियों से आगे रहा। नोएडा में तो ये चौथे स्थान पर रहा। वहीं जेवर में पांचवीं व दादरी में छठे स्थान पर रहा। अब देखना ये होगा कि इस बार के चुनाव परिणाम में नोटा की रैंकिग में गिरावट आती है या सुधार। वर्ष 2013 में आया नोटा

वर्ष 2013 में एक याचिका की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने नोटा विकल्प मतदाताओं को देने का आदेश दिया था। मुख्य निर्वाचन आयोग ने 2013 में ही इसका पालन करना शुरू कर दिया। 2017 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में इसे पहली बार शामिल किया गया। नोएडा में पाए सबसे अधिक वोट

2017 चुनाव में विधानसभा चुनाव में नोएडा में नोटा के अतिरिक्त 14 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था। 1787 (0.71 फीसद) वोट के साथ नोटा चौथे स्थान पर रहा। यहां कुल 2,54,408 वोट पड़े थे। दादरी से भी 14 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा, जिसमें 1665 (0.63 फीसद) वोट के साथ नोटा छठे स्थान पर रहा। यहां 2,65,281 वोट पड़े। वहीं जेवर में आठ प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा, जिसमें 1276 (0.61 फीसद) वोट पाकर नोटा पांचवें स्थान पर रहा। तीनों विधानसभा क्षेत्र में कुल 36 प्रत्याशियों ने किस्मत आजमाई, जिसमें से 24 प्रत्याशी नोटा से हार गए। इस बार कितने आसार

डिस्ट्रक्ट डेवलपमेंट रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (डीडीआरडब्ल्यूए) अध्यक्ष एनपी सिंह का मानना है कि इस बार नोटा पिछली बार के मुकाबले लोगों को कम पसंद आएगा। उनका तर्क है कि एक तो पिछली बार पहली दफा नोटा मशीन में शामिल हुआ था, जिस कारण कुछ लोगों ने उसका प्रयोग कर दिया। अब लोग वोट की ताकत को समझ गए हैं। वहीं दूसरा यह कि लोगों के सामने तीनों विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा के तीनों उम्मीदवार नए थे। लोगों को इनके बारे में कम जानकारी थी। अन्य दलों के प्रत्याशियों को लेकर भी ऊहापोह की स्थिति थी।

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