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नोएडा-ग्रेटर नोएडा के स्टेडियमों में खेल के बजाय हो रही शादियां, 5 साल में 50 Academies को नहीं मिला एक भी मेडल

Published: Tue, 06 Oct 2026 10:58 AM (IST)

नोएडा और ग्रेटर नोएडा के स्टेडियम महंगी फीस के कारण आम बच्चों के लिए ओलंपिक के सपने पूरे करने की बजाय अकादमियों की कमाई का जरिया बन गए हैं।

सेक्टर-21ए स्थित नोएडा स्टेडियम। जागरण आर्काइव

सेक्टर-21ए स्थित नोएडा स्टेडियम। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. नोएडा-ग्रेटर नोएडा स्टेडियमों में महंगी फीस से प्रशिक्षण मुश्किल।

  2. आम बच्चों के ओलंपिक सपने फीस के कारण अधूरे रह रहे हैं।

  3. अकादमियां कमाई पर ध्यान दे रही हैं, प्रतिभा विकास पर नहीं।

धर्मेंद्र चंदेल, नोएडा: नोएडा, ग्रेटर नोएडा में करोड़ों की लागत से बने इंटरनेशनल स्टेडियम प्राधिकरण और अकादमी चलाने वालों के लिए कमाई का जरिया बन गए हैं।

इलाके के किसी भी स्टेडियम में चले जाइए तो अधिक फीस के कारण ट्रैक पर ओलिंपिक का सपना लिए दौड़ता बच्चा नहीं मिलेगा। वहां मिलेगा तो चार हजार रुपये महीना देकर टेनिस सीखता पूंजीपति, राजनैतिक और प्रभावशाली का बेटा। वहीं बगल में स्विमिंग पूल में नेशनल तैयारी नहीं, समर कैंप के नाम पर क्रैश कोर्स चलता मिलेगा।

एडमिशन से पहले सैलरी स्लिप

चीन में सरकार छह वर्ष के बच्चों को गोद लेती है। इसके बाद इन बच्चों को अच्छा प्रशिक्षण दिलाती है और खर्च का भार उठाती है। अंतरराष्ट्रीय खेल होने पर चीन मेडल गिनता है, वहीं जिले में स्टेडियमों में प्रशिक्षण देने के नाम 6 साल के बच्चे से अकादमी पैसा लेती है।

अकादमी में एडमिशन के लिए पहले पापा की सैलरी स्लिप देखी जाती है। पड़ोसी राज्य हरियाणा में भी प्रशिक्षण लेने वाले खिलाड़ियों को फ्री खाना, रहना और पदक न जीतने की स्थिति में भी ढाई से सात लाख रुपये तक दिए जाते हैं।

किस खेल की कितनी फीस?

  • तीरंदाजी : 6,000 प्रतिमाह
  • बास्केटबाल/फुटबाल : 4,500 प्रतिमाह, ग्राउंड का किराया अलग
  • स्विमिंग: 8,000 प्रतिमाह
  • तलवारबाजी : 12,000 प्रतिमाह
  • लॉन टेनिस: 6,000 प्रतिमाह रैकेट
  • बैडमिंनट : 6000 प्रतिमाह
  • टेबल टेनिस : 5000 प्रतिमाह
  • एथलेटिक्स : 6000 प्रतिमाह
  • शूटिंग : 15000 प्रतिमाह

क्या है सबसे बड़ी समस्या?

सरकार ने स्टेडियम बनाए लेकिन सिस्टम नहीं बनाया। ठेका दे दिया पर पूछा नहीं कि खिलाड़ी कहां हैं? वहीं कोच की सैलरी कलेक्शन से जुड़ी है, मेडल से नहीं। दादरी, जेवर, दनकौर, रबूपुरा के सरकारी स्कूलों में आज तक कोई ट्रायल टीम नहीं गई। हीरे गांवों में हैं, पर नहीं खोजा नहीं जा सका है। स्टेडियम में अच्छे कोच नियुक्त कराने के साथ खिलाड़ियों को मामूली शुल्क पर प्रशिक्षण दिलाने का प्रयास किया जाना चाहिए।

स्टेडियम में अच्छे कोच नियुक्त कराने के साथ खिलाड़ियों को मामूली शुल्क पर प्रशिक्षण दिलाने का प्रयास किया जाएगा
कृष्णा करूणेश, सीईओ, नोएडा

स्टेडियम में खेल सुविधाओं को बेहतर और सस्ता किया जाएगा। अच्छे कोच नियुक्त करने के लिए अविलंब कदम उठाया जाएगा
प्रेरणा सिंह, एसीईओ, ग्रेटर नोएडा