नोएडा स्पोर्ट्स सिटी: 4000 आबादी वाले गांव की जमीन पर बिल्डर का कब्जा, ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन
नोएडा के सेक्टर-150 स्पोर्ट्स सिटी में मोमनाथल गांव के ग्रामीणों ने बिल्डर और प्राधिकरण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उनका ...और पढ़ें
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ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन ( एआई जेनरेटेड इमेज )
HighLights
नोएडा स्पोर्ट्स सिटी में ग्रामीणों का बिल्डर-प्राधिकरण के खिलाफ प्रदर्शन।
संशोधित लेआउट में 4000 आबादी की जमीन को खाली दर्शाया।
ग्रामीणों ने बिल्डर-अधिकारियों की मिलीभगत का लगाया आरोप।
कुंदन तिवारी, जागरण नोएडा। स्पोर्ट्स सिटी सेक्टर-150 स्थित एससी 01 में आवंटित भूखंड के बिल्डर पर ग्रामीणों की 4000 आबादी की जमीन को संशोधित लेऑउट प्लान में शामिल कर दिया गया हे।
शिकायत के बावजूद नोएडा प्राधिकरण में सुनवाई नहीं होने पर मोमनाथल गांव के लोगों ने बिल्डर और प्राधिकरण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। मंगलवार देर रात ग्रामीणों ने कैंडल मार्च निकाल अपना आक्रोश प्रकट किया।
कई लोगों ने दर्ज कराई आपत्तियां
प्राधिकरण ने स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के सेक्टर 78, 79, 150 और 152 के लिए बिल्डरों की ओर से प्रस्तुत संशोधित लेऑउट प्लान पर 11 अक्टूबर तक आपत्तियां मांगी थीं। कुल 225 लोगों ने आपत्तियां दर्ज कराईं, जिनमें 100 से अधिक सेक्टर-150 के एससी 01 से संबंधित हैं।
ग्रामीणों ने प्राधिकरण के नियोजन विभाग के अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया कि बिल्डर ने गलत संशोधित लेआउट प्लान प्रस्तुत किया है और उसमें गांव की आबादी की जमीन शामिल की गई है।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव के भीतर आने-जाने का 12 मीटर चौड़ा मुख्य मार्ग भी संशोधित लेऑउट में शामिल कर लिया गया है। उनका कहना है कि यह सड़क पिछले 15 वर्ष से गांव की आबादी में दर्ज है और प्राधिकरण के लेऑउट प्लान में भी इसका उल्लेख है।
इस अवधि में प्राधिकरण कई बार सड़क का निर्माण करा चुका है। इसके आसपास सीवर और पानी की निकासी की व्यवस्था है तथा बिजली के खंभे भी लगे हैं। इसके बावजूद संशोधित लेऑउट में सड़क को नहीं दिखाया गया है।
ग्रामीणों की भूमि को खाली दिखाया गया
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 4000 लोगों की आबादी वाली जमीन को खाली भूमि के रूप में दर्शाया गया है। उन्होंने बिल्डर और प्राधिकरण अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका जताते हुए कहा कि इससे गांव की आबादी और लोगों के घरों पर संकट खड़ा हो सकता है।
ग्रामीणों ने प्रस्तावित लेऑउट में सड़क और आबादी की जमीन की वास्तविक स्थिति दर्ज करने तथा उनके हितों की रक्षा की मांग की। उन्होंने प्राधिकरण से संशोधित लेऑउट की जांच कराने की अपील की।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि प्राधिकरण के वर्क सर्किल अधिकारी बिल्डर के पक्ष में जमीन अधिग्रहण के लिए उन पर दबाव बना रहे हैं। ग्रामीण अपनी जमीन देने को तैयार नहीं है, इससे उनकी नाराजगी बढ़ रही है।
ग्रामीणों ने लगाए कई आरोप
बता दें कि स्पोर्ट्स सिटी परियोजना का उद्देश्य फंसे 40 हजार फ्लैट खरीदारों को उनके घरों का मालिकाना हक दिलाना है। सुप्रीम कोर्ट ने प्राधिकरण को निर्देश दिया था कि परियोजना में भूखंड पाने वाले बिल्डरों के संशोधित लेऑउट प्लान नियमानुसार स्वीकृत किए जाएं।
इससे प्राधिकरण को बिल्डरों के पास फंसी रकम निकालने में भी मदद मिलेगी। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ बिल्डर प्राधिकरण अधिकारियों के साथ साठगांठ कर गलत लेऑउट स्वीकृत कराने की कोशिश कर रहे हैं, यह कार्य एक सिंडीकेट के रूप में किया जा रहा है।
