नोएडा में पश्चिमी यूपी का पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट, 20 KM के ग्रीन कॉरिडोर से 16 मिनट में पहुंचा धड़कता दिल
नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया है। 56 वर्षीय मरीज को ...और पढ़ें

कश्मीर में परिवार के साथ घूमने के दौरान 56 वर्षीय बुजुर्ग का हार्ट फेल हो गया था।
HighLights
पश्चिमी यूपी का पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट नोएडा में हुआ।
20 किमी के ग्रीन कॉरिडोर से 16 मिनट में पहुंचा दिल।
पंचकुला की युवती के दिल से 56 वर्षीय मरीज को नई जिंदगी मिली।
जागरण संवाददाता, नोएडा। सेक्टर-70 में रहने वाले भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव ऑफिसर को हार्ट अटैक आने के बाद पंचकुला की 30 वर्षीय युवती का दिल लगाने से नई जिंदगी मिली है। कश्मीर में परिवार के साथ घूमने के दौरान 56 वर्षीय बुजुर्ग का हार्ट फेल हो गया था।
पश्चिमी यूपी का पहला सफल ट्रांसप्लांट
फोर्टिस अस्पताल में चिकित्सकों ने गाजियाबाद-गौतमबुद्ध नगर प्रशासन की मदद से 20 किमी के ग्रीन कोरिडोर से युवती का 16 मिनट में जीवित हार्ट मंगवा कर पश्चिमी यूपी का पहला सफल ट्रांसप्लांट किया। विश्व हृदय दिवस पर मरीज और उनकी पत्नी ने हार्ट दान करने वाली युवती, डाॅक्टर व पुलिस अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।
तपस को सांस फूलने की थी दिक्कत
बंगाल के मूल निवासी तपस कुमार सेक्टर-70 में पत्नी मल्लिका और बेटे के साथ रहते हैं। बीएचईएल में एग्जीक्यूटिव ऑफिसर तपस कुमार पिछले दिनों पत्नी के साथ कश्मीर घूमने गए थे। वहां सीने में दर्द के बाद हार्ट-फेल हो गया। जांच में 75 प्रतिशत हार्ट फेल आया था। डाॅ. अजय कौल ने बताया कि भर्ती के समय तपस को सांस फूलने की दिक्कत थी।
30 वर्षीय युवती का हार्ट लगाया
हार्ट ट्रांसप्लांट न करने पर उनके बचने की संभावना बेहद कम थी। पत्नी मल्लिका के कहने पर तुरंत ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू हुई। डाॅ. शानू शर्मा की मानें तो पंचकुला के राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (एनओटीटीओ) में संपर्क किया। वहां विशेषज्ञों ने 30 वर्षीय युवती का हार्ट होने की पुष्टि की।
चंडीगढ़ से 45 मिनट में हिंडन एयरपोर्ट तक
उन्होंने जांच में सामान्य रिपोर्ट देखकर तुरंत हार्ट एयरलिफ्ट की तैयारी कराई। टीम के गौरव कुमार ने बताया कि हाई बीपी और ब्रेन हेमरेज के कारण युवती की पंचकुला में मौत हो गई थी। रीजनल डायरेक्टर मोहित सिंह ने बताया कि विशेषज्ञों की निगरानी में चंडीगढ़ से 45 मिनट में हिंडन एयरपोर्ट तक जीवित हार्ट लाया गया।
सभी जांच के बाद उन्हें घर भेजा
इसके बाद गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर पुलिस ने 20 किलोमीटर का ग्रीन कोरिडोर तैयार कर एंबुलेंस से हार्ट को 16 मिनट में अस्पताल पहुंचाया। अंग निकालने से लेकर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया में तीन घंटे का स्वर्णिम समय होता है। इसके बाद नसें खराब होने लगती हैं।
टीम में डाॅ. सौरव, डाॅ. पवन, गौरव, पीयूष और अन्य शामिल हुए। नौ सितंबर को चिकित्सकों ने सफल हार्ट ट्रांसप्लांट कर तापस कुमर को जीवनदान दिलाया। सभी जांच के बाद उन्हें घर भेज दिया गया है।
