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फर्जी जज और CBI अधिकारी बनकर लगाई ऑनलाइन कोर्ट, डिजिटल अरेस्ट कर नोएडा में रिटायर्ड कर्नल से 9 लाख ठगे

Published: Mon, 13 Jul 2026 09:49 PM (IST)Updated: Mon, 13 Jul 2026 09:51 PM (IST)

नोएडा में सेवानिवृत्त कर्नल को साइबर ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाकर दो दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। फर्जी ...और पढ़ें

रिटायर्ड कर्नल से जमा पूंजी को आरबीआई बैंक खातों में लेने के नाम पर नौ लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। एआई इमेज

रिटायर्ड कर्नल से जमा पूंजी को आरबीआई बैंक खातों में लेने के नाम पर नौ लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। एआई इमेज

HighLights

  1. सेवानिवृत्त कर्नल को मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाया गया।

  2. साइबर ठगों ने ऑनलाइन कोर्ट सुनवाई का नाटक रचा।

  3. डिजिटल अरेस्ट कर कर्नल से 9 लाख रुपये ठगे।

जागरण संवाददाता, नोएडा। सेक्टर 37 के सेवानिवृत्त कर्नल को मनी लांड्रिंग का केस दर्ज होने का डर दिखाकर साइबर ठगों ने दो दिन डिजिटल अरेस्ट रखा। ऑनलाइन कोर्ट में सुनवाई का नाटक रचा। ठगों ने जज व सीबीआई अधिकारी बन कर्नल को जेल भेजने का डर दिखाया। जमा पूंजी को आरबीआई बैंक खातों में लेने के नाम पर नौ लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए।

दो दिन बाद घरवालों से मिले तो...

दो दिन कमरे से बाहर न निकलने पर स्वजन ने दरवाजा खोल कर्नल से बात की तो बताया ये तो साइबर ठग है। ऑनलाइन सुनवाई की वजह से कर्नल समझ ही नहीं पाया कि उनके साथ साइबर ठगी हो रही है। स्वजन की सतर्कता से वह ठगों के जाल से चुगल से निकल सकें। साइबर क्राइम थाने में रविवार को मामला दर्ज कराया।

ऐसे मन में बैठाया डर

नोएडा सेक्टर 37 के रहने वाले सेवानिवृत्त कर्नल विजय के मोबाइल पर 20 मई की सुबह करीब 10 बजे जगदीप नाम के कथित सीबीआइ कर्मी का फोन आया। उसने नाम, पता व आधार कार्ड के बारे में जानकारी कर बताया कि विजय के आधार से मुंबई में केनरा बैंक की शाखा में बैंक खाता खोला गया है।

अवैध लेनदेन करने के चलते मनी लांड्रिंग का केस चल रहा है। यह सुन विजय चौंक गए। उन्होंने केस दर्ज होने से इनकार करते हुए फोन काट दिया। उसने दोबारा फोन कर चिल्लाते हुए तत्काल गिरफ्तारी होने बात बोलकर डराया। विश्वास दिलाने के लिए वाट्सअप पर वारंट भेज दिया। तत्काल दिल्ली आकर बयान दर्ज कराने और गिरफ्तारी देने को बोला। खुद के नाम वारंट होने पर कर्नल डर गए।

जांच में सहयोग करने को तैयार हो गए

इसके बाद जब कर्नल ने खुद को बेकसूर और बुजुर्ग बताया तो ठगों ने झट से दिशा-निर्देश भेज दिए। डिजिटल अरेस्ट रहने तक किसी से भी केस के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं करने की सख्त हिदायत दी।

फिर ठगों ने कर्नल को वीडियो काॅल पर लेकर पूछताछ करने लगे। ठगों ने वरिष्ठ सीबीआइ अधिकारी आकाश कुलहारे व जज बन ऑनलाइन सुनवाई की। कहा कि जमा पूंजी मनी लांड्रिंग केस में संलिप्त नहीं होने छोड़ दिया जाएगा। वह जांच में सहयोग करने को तैयार हो गए।

ठगी में संलिप्त बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही

ठगों ने आरबीआई के सोशल सिक्योरिटी अकाउंट में रकम लेकर लौटाने की बात बोली। कर्नल ने 22 की सुबह तक करीब नौ लाख रुपये ठगों के बताए खातों में डाल दिए। 22 मई की दोपहर तक रकम वापस नहीं मिली तो शक हुआ।

इसी बीच स्वजन ने उसने बात की तो ठगी के बारे में बताकर आगे रकम देने से मना कर दिया। एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत की। डीसीपी साइबर सुरक्षा शैव्या गोयल ने बताया कि पीड़ित की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच कराई जा रही है। ठगी में संलिप्त बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है।

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