नोएडा में महर्षि आश्रम की जमीन पर ED की जांच हुई तेज, दो कर्मचारियों से पूछताछ; जिम्मेदारों ने बंद किए आंख-कान
नोएडा में महर्षि आश्रम की जमीन पर अवैध निर्माण और बिक्री के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच तेज ...और पढ़ें

महर्षि आश्रम की करोड़ों की जमीन पर बिल्डर जमीन पर फ्लैट, विला बनाते रहे। काॅलोनाजर अवैध काॅलोनी बसाते रहे और प्राधिकरण के अधिकारी सोते रहे। फाइल फोटो
HighLights
ईडी ने महर्षि आश्रम जमीन घोटाले में जांच तेज की।
नोएडा प्राधिकरण के दो कर्मचारियों से गहन पूछताछ की गई।
पूछताछ में बड़े अधिकारियों की संलिप्तता का खुलासा हुआ।
कुंदन तिवारी, नोएडा। महर्षि आश्रम की जमीन पर निर्माण की गतिविधियों में संलिप्तता के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कई प्राधिकरण अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की। देर रात रिहा किया गया। पूछताछ के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि आश्रम की जमीन लगातार बिकती रही। बिल्डर जमीन पर फ्लैट, विला बनाते रहे। काॅलोनाजर अवैध काॅलोनी बसाते रहे।
अरबों रुपये की जमीन पर किया बंदरबांट
2019 से 2023 के बीच अरबों रुपये की करीब तीन हजार बीघा जमीन भू-माफिया और काॅलोनाइजरों ने बेच दी। नोएडा प्राधिकरण में उस समय तैनात सभी अधिकारी और कर्मचारी आंख मूंदे बैठे रहे। सूत्रों का दावा है कि बदले में अधिकारियों को हिस्सेदारी मिली। इसकी एवज में प्राधिकरण अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। मोटा लाभ लेकर नामी और बेनामी संपत्तियों बनायी। काले धन को सोने में खपाने में आरोप भी लगे।
दो कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की
प्राधिकरण कार्यालय पर महर्षि आश्रम की जमीन की बिक्री व निर्माण की शिकायतों का अंबार लगा रहा, लेकिन अधिकारियों ने शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया। यह मामला न केवल भ्रष्टाचार को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारियों का पालन नहीं किया। इस मामले में ईडी ने सोमवार रात प्राधिकरण के दो कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी।
ऑनलाइन और ऑफलाइन साक्ष्य जुटाए
सूत्र बताते हैं कि कर्मचारी पहले तो किसी भी कबूलनामे से बचते रहे, लेकिन जब जांच टीम ने उनके सामने दस्तावेजों के साथ साक्ष्य प्रस्तुत किए, तो उन्होंने प्राधिकरण अधिकारियों की संलिप्तता को उजागर कर दिया।
यह भी बता दिया कि वह किस-किस के लिए कैसे कैसे काम कर कैश जुटा रहे थे। ईडी ने मामले में कैश फ्लो की जांच के लिए आयकर की इनवेस्टिगेशन विंग का पूरा सहयोग लिया है। पिछले छह महीनों से इस मामले की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही थी, जिसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह के साक्ष्य जुटाए गए।
एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया गया
अचानक निचले स्तर के कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद शीर्ष अधिकारियों में हड़कंप मच गया। कई अधिकारियों ने बीमारी का बहाना बनाकर कार्यालय आना बंद कर दिया, जबकि कुछ ने फोन बंद रखे ताकि उनसे संपर्क न किया जा सके।
यहीं नहीं एक अधिकारी को शीर्ष अधिकारी ने तुरंत कार्यालय से बाहर जाने का आदेश तक दे दिया, जिसके बाद वह दो कर्मचारियों के साथ देर रात तक एक प्राइवेट वाहन में शहर की सड़कों पर घूमता रहा। यह ध्यान देने योग्य है कि उस अधिकारी का विभाग इस मामले में शामिल नहीं था, लेकिन एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया गया।
ईडी की गिरफ्त से छूटने पर दी सफाई
सूत्रों का कहना है कि जब अधिकारी और कर्मचारी ईडी की गिरफ्त से बाहर आए, तो उन्होंने बताया कि उन्हें केवल यह जानकारी देने के लिए उठाया गया था कि शीर्ष अधिकारियों की संलिप्तता कितनी और किस प्रकार की है। उनके पास इस मामले में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े सभी व्यक्तियों का पूरा लेखा-जोखा है।
बिचौलिया चौहान साहब भी शामिल
महर्षि की जमीन की खरीद-बिक्री और निर्माण करने वाली एजेंसियों के साथ प्राधिकरण अधिकारियों की बेहतर सेटिंग कराने वाले बिचौलिया चौहान साहब की भी पूरी जानकारी जांच अधिकारियों के पास मौजूद है कि उन्होंने कहां कहां पर सरकारी जमीन कब्जा कर अवैध रूप से निर्माण कराया है, उनकी कौन कौन से कंपनियां इसमें संलिप्त है।
