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नोएडा बस हादसा: सास के अंतिम संस्कार को निकली थी रेखा, रास्ते में पति को आखों के सामने खो दिया

Published: Fri, 25 Sep 2026 04:33 AM (IST)

महोबा में मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने जा रहे देवेंद्र भारद्वाज और अपने बेटे को लेने नोएडा आए ...और पढ़ें

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HighLights

  1. महोबा जा रहे देवेंद्र भारद्वाज की बस आग में मौत।

  2. रेखा ने अपनी आंखों के सामने पति को खो दिया।

  3. हरिशरण गुप्ता की भी बस आग में दर्दनाक मृत्यु हुई।

जागरण संवाददाता, नोएडा। हादसे ने कई परिवारों को जिंदगी भर का जख्म दे दिया। महोबा में अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने जा रहे देवेंद्र भारद्वाज को क्या पता था कि यह सफर उनके जीवन का अंतिम सफर बन जाएगा। हिसार निवासी देवेंद्र अपनी पत्नी रेखा के साथ स्लीपर बस से महोबा लौट रहे थे। रात करीब 11:30 बजे बस में अचानक आग लग गई।

गहरी नींद में सो रहे यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। रेखा किसी तरह बस से बाहर निकलने में सफल रहीं, लेकिन कुछ समय पूर्व हुए हादसे के कारण देवेंद्र के पैर में राड लगी थी, जिससे वे तेजी से बाहर नहीं आ सके। बाहर खड़ी रेखा अपने पति को बचाने के लिए बिलखती रही, चीखती रही, लेकिन आग की उठती भयावह लपटों ने किसी को अंदर जाने का मौका नहीं दिया। देखते ही देखते देवेंद्र लपटों से घिर गए। सास की चिता तक पहुंचने से पहले ही रेखा के सामने उसके पति की जीवनलीला समाप्त हो गई।

बहन तू जल्दी आजा, बस में आग लग गई और पापा अंदर फंस गए हैं

पोस्टमार्टम हाउस पर उरई की राधिका मोबाइल में पिता हरिशरण गुप्ता की फोटो लोगों को दिखाकर उनसे मिलवाने के लिए बोल रही थीं। राधिका को ज़रा भी अंदेशा नहीं था कि बस के अंदर बुरी तरह झुलसने पर पिता की दर्दनाक मौत हो चुकी थी और शव डीप फ्रीजर में रखा था।

राधिका ने बताया कि 17 वर्षीय भाई ओम गुप्ता भी नोएडा में बीटेक की पढ़ाई करता है। पिता उरई से नोएडा उसे लेने आए थे। रात करीब ढाई बजे ओम ने रोते-रोते राधिका को बताया कि बहन, बस में आग लग गई और पापा अंदर फंस गए हैं। अब तू जल्दी कैब लेकर यहां आ जा।

आगे बैठे यात्रियों बच गई जान, पीछे वालों को निकलने का मौका भी न मिला

जागरण टीम, कानपुर। बस में 35 वर्षीय हासिर भी सवार थे। सकुशल घर लौटने के बाद उन्होंने बताया कि नोएडा से सवार हुए तो करीब 30 से 40 किमी चलते ही अंदर धुंआ भरने लगा और बस झटके से रुक गई। आगे की ओर जाकर देखा तो चालक-क्लीनर नहीं थे।

इस बीच बस लपटों से घिर गई और यात्री छटपटाने लगे। पीछे वाली सीट पर बैठे छह से सात लोग तो निकल ही नहीं पाए और जल गए। उन्होंने बताया कि करीब 14 लोगों की जान बचाई। बस में 40 से अधिक सवारियां थीं। करीब डेढ़ घंटे बाद पुलिस, फायर व एंबुलेंस टीम पहुंची तब मदद मिल सकी।