जागरण संवाददाता, नोएडा :

नोएडा और ग्रेटर नोएडा के निवासियों के लिए एक राहत भरी खबर है। बदबू के कारण लोगों का सिरदर्द बने कोंडली नाले में जाने वाली गंदगी को रोकने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने नौ सूत्रीय कार्ययोजना तैयार की है। इस कार्ययोजना के परवान चढ़ते ही जहां लोगों को राहत मिलेगी, वहीं वातावरण में घुलने वाली विषैली गैसों से भी निजात मिल सकेगी। इसके लिए एनजीटी के निर्देश पर नोएडा प्राधिकरण ने विस्तृत कार्ययोजना तैयार की। इस कार्ययोजना को बृहस्पतिवार को एनजीटी को सौंप दिया गया है।

अधिकारियों के मुताबिक नौ सूत्रीय कार्ययोजना में सर्व प्रथम अधिक क्षमता वाले ऐसे स्लम, क्षेत्र व औद्योगिक इकाइयां हैं जो अपशिष्ट को नालियों में बहा रहे हैं। शहर में मौजूदा सीवरेज नेटवर्क को मजबूत करना। अधिक सार्वजनिक शौचालय बनाए जाना। अधिक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण, नाली के चारों ओर अतिक्रमण की जांच करना और छह स्थानों पर नालों के पास वेटलैंड बनाकर नाले का सुंदरीकरण करना शामिल है।

बता दें कि यमुना में प्रदूषण की मुख्य वजह कोंडली नाला है। नोएडा में प्रतिदिन 216 मिलियन लीटर (एमएलडी) सीवरेज का उत्पादन होता है। जिसमें 152 एमएलडी को शोधित किया जा रहा है। शेष 64 एमएलडी अपशिष्ट बिना शोधित किए ही यमुना में चला जाता है। यह 64 एमएलडी नोएडा से जुड़े सीमावर्ती इलाकों से आता है। जहां पानी को शोधित करने के लिए कोई एसटीपी नहीं है। बहरहाल प्राधिकरण की ओर से सभी तरह की योजनाओं पर निर्धारित लक्ष्य के साथ काम शुरू हो चुका है। इसके अलावा 180 एमएलडी क्षमता के एसटीपी का निर्माण भी आगामी वर्षों में कर लिया जाएगा। इससे एक बूंद पानी भी बिना शोधित किए नालों में नहीं बहाया जा सकेगा। इसके अलावा कृत्रिम वेटलैंड का निर्माण भी शामिल है। यह वेटलैंड गंदे पानी को शोधित करेगा।

------------

20 किमी लंबे नाले में दिल्ली से गिरता अपशिष्ट

40 साल पुराना और 20 किमी लंबा कोंडली नाला दिल्ली के कोंडली गांव से निकलता है और सेक्टर 11 में हरीदर्शन पुलिस चौकी के पास नोएडा में प्रवेश करता है। नोएडा से सेक्टर-17, सेक्टर-12, सेक्टर-22 से होते हुए लगभग 17 किमी का सफर तय करता है। सेक्टर-50, सेक्टर-92 और सेक्टर-168 से होते हुए चकमंगरोली के पास यमुना में मिलता है।

Edited By: Jagran