ग्रेटर नोएडा [अर्पित त्रिपाठी]। इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicle) को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार (Central Government) हरसंभव कोशिश कर रही है। चार्जिंग प्वाइंट की संख्या कम होने के कारण लोगों के मन में यह धारणा बनी हुई है कि कहीं सीएनजी पंप (CNG Pump) की तरह उन्हें भी लंबी लाइन में न लगना पड़ जाए। चार्जिंग में अधिक समय लगने के कारण लोग इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से झिझक रहे हैं। लोगों के इस समस्या को दूर करने के लिए नोएडा स्थित एडिथ कंपनी ने खासकर सोसायटियों को ध्यान में रख कर चार्जिंग सिस्टम तैयार किया है।

इसकी खासियत यह है कि एप आधारित चार्जिंग सिस्टम से वह लोग ही चार्ज कर सकेंगे जो पहले से पंजीकृत होंगे। अपंजीकृत व्यक्ति यदि चार्जिंग की कोशिश करेंगे तो बैटरी चार्ज नहीं होगी। इसकी दूसरी खासियत यह है कि इसे लगाने के लिए अलग से बिजली लाइन की जरूरत नहीं है। घरेलू कनेक्शन वाले लोड पर यह संचालित होगा। यह सिस्टम दो पहिया, तीन पहिया और चार पहिया वाहनों के लिए कारगर है। नोएडा सेक्टर 75 स्थित गोल्फ एवेन्यू वन सोसायटी में इसका प्रयोग भी हो रहा है। इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में चल रहे इलेक्ट्रानिका एक्सपो में कंपनी ने चार्जिंग सिस्टम को प्रदर्शित किया है।

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पार्किंग के 20 प्रतिशत हिस्से में लगाने होंगे चार्जिंग प्वाइंट

कंपनी संस्थापक हिमांशू तोमर ने बताया कि उन्होंने साल 2018 में गाजियाबाद के इंद्रप्रस्थ कालेज से पढ़ाई करने के बाद दो साल तक नौकरी की। ईवी क्षेत्र में बढ़ती संभावना को देखते हुए 2020 में चार दोस्तों के साथ कंपनी की नींव रखी। केंद्र सरकार पार्किंग क्षेत्रफल के 20 प्रतिशत क्षेत्र में ईवी के लिए चार्जर प्वाइंट को अनिवार्य कर रही है। चार्जिंग सिस्टम सोसायटी के लिए कारगर है।

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नोएडा की सोसायटी के अलावा नोएडा में टेक्निक कंपनी, पटना, लखनऊ, पलवल, कोलकाता में चार्जर लगाए हैं। एप के जरिये चार्जिंग के लिए पंजीकरण कराना होगा। एक आइडी मिलेगी। इसमें वालेट होगा जिसमें पैसा जमा कर सकते हैं, जितनी बिजली यूनिट इस्तेमाल होगी, उतना शुल्क कट जाएगा। चार्जिंग का डेटा आनलाइन होगा। चार्जर पर मीटरिंग सिस्टम लगा है यानी अलग से मीटर नहीं लगाना पड़ेगा। एक प्वाइंट का खर्च 25 से 30 हजार रुपये खर्च है। इसकी क्षमता 7.4 किलोवाट है।

अल्गोरिथम का मिलने वाला है कापीराइट

कंपनी द्वारा बनाए बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम में पांच टेंपरेचर सेंसर लगे हैं। जो बैटरी का तापमान बढ़ने की जानकारी देंगे। बैटरी सिस्टम की पूरी जानकारी एक डिवाइस के जरिये कंप्यूटर पर सुरक्षित रहेगी। इस डाटा से आग लगने के कारण का पता चल जाएगा। बैटरी के सेल की गुणवत्ता की पल-पल की जानकारी यानी कितनी बार चार्ज, कितनी बार डिस्चार्ज, हर सेल का डाटा उपलब्ध रहेगा है। इस बीएमएस के साफ्टवेयर में एल्गोरिथम लिखी हुई है जिसके कापीराइट के लिए आवेदन किया जा चुका है।

Edited By: Aditi Choudhary