नई दिल्ली/नोएडा [लोकेश चौहान]। Tea in India:  बात चाहे थकान दूर करने की हो या फिर ताजगी की, चाय एक ऐसा शब्द है जो इसमें सजीव रूप से शामिल होती है। घर-ऑफिस से लेकर मार्केट व सड़क पर चाय की खुशबू महकती है। चाय के बारे में शायद यह बात बहुत कम लोगों को पता हो कि हमारे देश में नौ केंद्र शासित प्रदेशों में से किसी में भी चाय का उत्पादन नहीं होता है। हालांकि, देश के 28 राज्यों में से आधे से अधिक में चाय पैदा होती है। वहीं सबसे दिलचस्प बात यह है कि ग्रीन-टी, ब्लैक-टी के अलावा व्हाइट-टी भी देश में ही पैदा होती है। इतना ही नहीं, बीते तीन वित्तीय वर्षों में देश में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर के चाय के कार्यक्रम भी खूब आयोजित होते रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2019-20 में अब तक के सबसे अधिक घरेलू चाय कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जबकि इसी वित्तीय वर्ष में अंतरराष्ट्रीय चाय कार्यक्रमों की संख्या सबसे कम रही है।

इन राज्यों में होती है चाय की पैदावार

नोएडा के आरटीआइ एक्टिविस्ट रंजन तोमर द्वारा भारत सरकार के टी-बोर्ड में लगाई गई आरटीआइ में यह जानकारी मिली है कि देश के 28 राज्यों में से 15 राज्यों में चाय पैदा होती है। इनमें असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, सिक्किम, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय और नागालैंड में चाय उत्पादन होता है। इसके अलावा चाय के प्रसंस्करण की विधि के अनुसार चाय ग्रीन-टी, ओलोंग-टी, ब्लैक-टी और व्हाइट-टी आदि में बांटा गया है। ब्लैक-टी को आर्थोडाक्स और सीटीसी के रूप में बांटा जा सकता है। जबकि चाय को आर्गेनिक-टी, फ्लेवर्ड-टी और इंस्टेंट-टी के रूप में भी वर्गीकृत किया जा सकता है।

वर्षवार किए गए चाय आयोजन

वर्ष                    घरेलू          अंतरराष्ट्रीय

2017-18 :           09                14

2018-19 :          11                  13

2019-20 :          32                  03

टी-बोर्ड का है करोड़ों का बजट

वर्ष              बजट

2014-15 : 180.59

2015 -16 : 189.45

2016-17 : 152.15

2017-18 : 194.90

2018-19 : 160.20

21 मई को होता है अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस

आरटीआइ में टी-बोर्ड ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने हर साल 21 मई को अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस घोषित किया है। जिसे पूरी दुनिया में धूमधाम से मनाया जाता है।

यह भी जानें

  • चीन की खोज इतिहास की 5000 साल पुरानी एक घटना ने की थी। चीन के सम्राट शेन नुग्न खुद को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना गर्म पानी पीते थे। एक दिन उनके गर्म पानी में कुछ पत्तियां गिर गईं। इससे पानी का रंग बदल गया और खुशबू भी आने लगी। सम्राट ने जब उस पानी को पिया तो उन्हें गजब की ताजगी महसूस हुई। इस तरह से चाय की खोज हुई। इसके बाद सम्राट ने सभी को इन चाय की पत्तियों को उबालकर पीने की सलाह दी। इसके बाद ये पेय पूरे चीन का पसंदीदा बन गया।
  • 10 जनवरी 1835 को भारत से चाय की पहली खेप इंग्लैंड पहुंची थी। इसके बाद चीन ने अंग्रेजों से व्यापारिक समझौता कर चाय के बीज  दिए। इसके बाद पूर्वोत्तर के ठंडे इलाकों में बागान तैयार कराए गए। पूर्वोत्तर में इन बीजों ने चीन से बेहतर चाय पैदा की। इसके बाद भारतीय बाजार से चाय का स्वाद पूरी दुनिया में फैल गया।
  • देश में हिमाचल, दार्जिलिंग व तमिलनाडू आदि जगहों की चाय पूरी दुनिया में आपूर्ति होती है।
  • हमारे देश में तकरीबन 50 से ज्यादा किस्म की चाय उगाई जाती है।

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