नोएडा [कुंदन तिवारी]। दिल्ली- एनसीआर जहां प्रदूषण से जूझ रहा है वहीं प्रकाश पर्व मना रहे सिख युवक वायु प्रदूषण कम करने की नेक कोशिश कर रहे हैं। गुरु नानक साहब के प्रकाश उत्सव पर आप ने कहानी अवश्य सुनी होगी कि उनके पिता ने 20 रुपये देकर कारोबार करने के लिए घर से भेजा था लेकिन नानक साहब सारे रुपये उन गरीब को खाना खिला, कुछ किरत (दिन भर रोजी रोटी के लिए मेहनत करने वाले गरीब) करने वालों को कारोबार करने के लिए देकर चले आए। उनका यह कथन था ‘किरत करो वंड छको’ (खूब काम करो लंगर में जमकर खाओ)।

संत वह नहीं है, जो केवल भगवान की उपासना करता है, बल्कि असली संत वह है जो दिन पर किरत करता है। उसके बाद खुद व परिवार को भोजन करवाता है। उसके बाद किरत करने वाले गरीबों का भी पेट भरता है। गुरु नानक के इन्हीं विचारों को लेकर आज नोएडा में 550 वां प्रकाश उत्सव मनाया जा रहा है। जश्न में केवल नोएडा का सिख समुदाय ही नहीं, बल्कि दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे देश का सिख समुदाय सराबोर है।

नोएडा के कुछ सिख एनसीआर की जहरीली हवा में रात दिन काम करने वाले लेबर चौक के मजदूर, सेक्टर-सोसायटी के घरों में काम करने वाली मेड व सिक्योरिटी गार्ड, प्राधिकरण सफाई कर्मी, यातायात-पुलिस के जवान, पेट्रोल पंप कर्मी जैसे किरत करने वालों को गुड़ वितरित कर रहे हैं।

हरमीत सिंह, दलजीत सिंह, हरप्रीत सिंह, दिलबाग सिंह, सुमित सेठ, वंश राज सिंह, रवि इंदर सिंह, कुल¨वदर कौर, किरनप्रीत कौर, भिमेश इस्सर, लावान्या सेठ, सुधीर पांडेय की ओर से विशेष सहयोग दिया जा रहा है। उद्यमी दलजीत सिंह कहते हैं कि प्रदूषण में जब हम मॉस्क लगाकर घर के अंदर भी घूम रहे हैं, उसमें भी यह किरत लोग अपने स्वास्थ्य की चिंता किए बिना हमारी सेवा कर रहे हैं।

ऐसे में फेस टू स्थित कुछ उद्यमी साथी की ओर से सलाह कर इस प्रकाश उत्सव पर गुड़ वितरण की योजना तैयार की गई थी, चूंकि प्रकाश उत्सव के दौरान प्रतिवर्ष एनसीआर में भीषण प्रदूषण होता है। ऐसे में चार एकड़ जमीन पर पिछले तीन वर्ष से बिना प्रेस्टिसाइट के फसल उगाने का प्रयास किया जा रहा है, इसकी पहली फसल फार्म हाउस पर गन्ने के रूप में उगाई गई है। उसी पहली फसल से 600 किलोग्राम कैमिकल रहित गुड़ तैयार कराया।

महिला उद्यमी किरनप्रीत कौर का कहना है कि 200-200 ग्राम गुड़ का कागजी पैकेट तैयार कर बसों द्वारा वितरित किया जा रहा है। बता दें कि देश में जहां-जहां पर क्रशर जोन संचालित हो रहे हैं, वहां पर काम करने वाले श्रमिकों को गुड़ का वितरण अवश्य किया जाता है। जिससे उनकी दिन भर में जो डस्ट मुंह के जरिये शरीर के अंदर गया है। उसको साफ किया जा सके।

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Posted By: Mangal Yadav

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