ग्रेटर नोएडा, जागरण संवाददाता। जिला न्यायालय ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात गैंगस्टर सुंदर भाटी और उसके गिरोह के 11 बदमाशों को सपा नेता हरेंद्र प्रधान व सरकारी गनर भूदेव शर्मा हत्याकांड में दोषी करार दिया है। इस मामले में बदमाश सुंदर भाटी समेत 12 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। एक आरोपित को बरी कर दिया गया है। मनोज निवासी साकीपुर को केस में बरी किया गया है। घटना के दौरान वह राजस्थान मेहंदीपुर बालाजी में था।

सुंदर भाटी, सिंघराज व उसके गिरोह के ऋषिपाल, कालू, बिल्लू, अंकित, विकास समेत 12 लोगों को दोषी करार दिया गया है। सभी को हत्या का आरोपित मानकर सजा सुनाई गई। इसी के साथ इस मामले में अदालत ने बदमाशों की गोली से मारे गए पुलिसकर्मी को 1 लाख की आर्थिक सहायता देने का भी फैसला सुनाया है।

मालूम हो कि इससे पहले जिला न्यायालय में मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई में आरोपितों को दोषी करार दिया गया मगर अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया। अब अदालत ने फैसला सुनाया। कुख्यात बदमाश सुंदर भाटी को पहली बार किसी मामले में दोषी माना गया है। अब तक वह गवाहों व पक्षकारों पर दबाव बनाकर बरी होता रहा था। हरेंद्र प्रधान हत्याकांड में गवाहों पर कोई दबाव नहीं बन सका। वर्ष 2017 में केस की पहली गवाही हुई थी।

हरेंद्र के भाई रवि नागर, आजाद, विकास, प्रवीण, सतेंद्र व राजकुमार हत्याकांड में मुख्य गवाह रहे। अभियोजन पक्ष के निजी अधिवक्ता सुशील भाटी ने बताया कि दनकौर कोतवाली क्षेत्र के दादूपुर गांव निवासी समाजवादी पार्टी के नेता व प्रधान हरेंद्र की आठ फरवरी, 2015 को कासना कोतवाली क्षेत्र स्थित नियाना गांव में शादी समारोह में हत्या कर दी गई थी। मामले में सुंदर भाटी समेत 13 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। पुलिस ने सभी आरोपितों को गिरफ्तार किया था। सात साल तक चले केस की सुनवाई के दौरान कुल 22 गवाह पेश हुए।

आठ फरवरी, 2015 को शादी समारोह के दौरान हत्याकांड को दिया गया था अंजाम

हरेंद्र प्रधान व सुंदर भाटी के बीच सरिया चोरी, फैक्ट्री के स्क्रैप व पीने के पानी की सप्लाई को लेकर दुश्मनी शुरू हुई। सुंदर चाहता था कि हरेंद्र उसके सामने कोई ठेका न लें और न ही किसी काम में कोई दावेदारी ठोके, लेकिन हरेंद्र ने सुंदर को अपने इरादों में कामयाब नहीं होने दिया। दोनों के बीच ठेकों को लेकर पहले विवाद हुआ, फिर सुंदर ने हरेंद्र की हत्या करवा दी।