नोएडा [मोहम्मद बिलाल]। Noida Air Pollution:जिले में वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए शनिवार से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) लागू हो गया। पहले दिन प्रदूषण विभाग की टीम नियमों का पालन कराने में नाकाम रही। शहर में बिजली आपूर्ति बाधित होने पर कई उद्योगों और सोसायटी में डीजल जेनरेटर चले। चोरी छिपे कू़ड़ा जलाने, खुले में निर्माण सामग्री के कारण उड़ने वाली धूल, प्रदूषण फैला रहे वाहनों के चलने, सड़क मरम्मत कार्य के लिए डामर पिघलाने की मशीन चलने से निकले धुएं ने शहर की हवा में जहर घोल दिया। शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स कई जगह पर मध्यम तो कई जगह पर खराब श्रेणी में दर्ज किया गया।

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जिला स्तर पर वायु प्रदूषण की निगरानी के लिए 14 टीमें गठित हैं। टीमें को का काम दिन-रात प्रदूषण से संबंधित गतिविधियों पर नजर रखना है। पहले दिन टीम के सदस्य दिशा निर्देशों का पालन करने की अपील तक सीमित रहे।

यही कारण रहा कि ग्रेप के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ी। सेक्टर-61 के पास सड़क मरम्मत कार्य के लिए डामर पिघलाने की मशीन घंटों चलने से निकल धुआं हवा में घुल गया। सेक्टर-62, सेक्टर-63, सेक्टर-64, सेक्टर-65 सहित अन्य जगह पर निर्माण सामग्री खुले में पड़ी रही।

दिन में कई बार बिजली कट होने से औद्योगिक इकाइयों में डीजल जनरेटर का प्रयोग हुआ। जबकि विभाग की ओर से औद्योगिक क्षेत्रों में विशेष निगरानी का दावा किया गया था। आदेशों के उल्लंघन पर जुर्माना लगाने की बात थी। शहर में डीजल जनरेटर पूरी तरह प्रतिबंध लग गया है। उद्योगों को केवल पीएनजी व बायोमास का इस्तेमाल करने की इजाजत है।

इमरजेंसी सेवाओं जैसे अस्पताल, लिफ्ट के लिए जनरेटर चलाने की अनुमति है लेकिन वर्तमान में जिले में चल रहीं 95 प्रतिशत औद्योगिक इकाइयों में बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद डीजल जनरेटर चलाया जाता है। 600 से ज्यादा सोसायटी में बिजली आपूर्ति के लिए विकल्प के रूप में डीजल जनरेटर का इस्तेमाल होता है।

बिजली के कट होने पर कुछ देर रहे उद्योग बंद रहे तो हाईराइज सोसायटी में लोग लिफ्ट नहीं चलने से परेशान हुए। शनिवार सुबह शहर का एक्यूआइ (वायु गुणवत्ता सूचकांक) मध्यम श्रेणी में दर्ज किया गया। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी प्रवीण कुमार ने बताया कि ग्रेप नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

खुले में पड़ी है निर्माण सामग्री

एनजीटी के आदेशानुसार निर्माण स्थलों पर प्रदूषण नियंत्रण के माकूल इंतजाम होने चाहिए। निर्माण सामग्री पूरी तरह ढंकी होनी चाहिए, लेकिन शहर में कहीं भी निर्माण स्थल पर निर्माण सामग्री ढके में नहीं रखी गई है। सभी जगह ये खुले में ही पड़ी हुई है। इसकी वजह से सीमेंट और मिट्टी हवा के साथ दिनभर उड़ती रहती है, जो आबोहवा को जहरीला बना रही है। इसका असर लोगों को स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।

कई जगह पर निर्माण स्थलों पर खानापूर्ति के लिए दिन में एक या दो बार पानी का छिड़काव किया गया। नियमित तौर पर पानी का छिड़काव नहीं होने से धूल उड़ती रही। शेड लगाए बिना धड़ल्ले से निर्माण कार्य चलने के कारण तोड़फोड और निर्माण के दौरान धूल उड़ती रही। शहर में जगह जगह खुले में मलबे के भी ढेर लगे हुए हैं, जो प्रदूषण का एक कारण है।

29 स्थान हाट स्पाट में शामिल

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक छह श्रेणियों में 29 स्थानों की हाट स्पाट के रूप में पहचान की गई है। यह हवा को जहरीली बनाने के सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं। विभाग की ओर से शहर में प्रदूषण के सबसे बड़े कारक कंस्ट्रक्शन, रोड डस्ट, औद्योगिक इकाई, यातायात, कूड़ा जलाने और पार्किंग के खुले स्थानों को माना जाता है। प्रदूषण की रोकथाम के लिए प्राधिकरण की दस और प्रदूषण बोर्ड की चार टीमें काम है।

वहीं, आपूर्ति विभाग, यातायात, एआरटीओ, विद्युत विभाग के पास भी जिम्मेदारी है। विभाग की ओर से सेक्टर-51, 52, सेक्टर सेवन एक्स, डीएफसीसी, एफएनजी, सेक्टर-150 और निर्माणाधीन अंडर पास को निर्माणाधीन क्षेत्र में रखा गया है। सेक्टर-150, सेवन एक्स, एफएनजी, दादरी रोड, पुराना औद्योगिक क्षेत्र को रोड डस्ट क्षेत्र शामिल किया गया है।

औद्योगिक फेज-1 और फेज-2 शामिल हैं। यातायात की दृष्टि से फिल्म सिटी, डीएनडी लूप, एलिवेटेड रोड एंट्री और एग्जिट, बरौला, भंगेल, मामूरा, सेक्टर-18, सिटी सेंटर शामिल हैं। कूडा निस्तारण वाले क्षेत्र में सेक्टर-145 और 146, दादरी रोड और फेज-2 औद्योगिक क्षेत्र शामिस हैं।

नए नियमों का पालन कराना चुनौती

एक्यूआइ के 301 से 400 के बीच पहुंचने पर मशीन से सड़कों की सफाई होगी। होटल, रेस्तरां में कोयले व लकड़ी के तंदूर जलाने पर रोक रहेगी। कंस्ट्रक्शन साइट पर निगरानी बढ़ेगी। 401 से 450 सफाई करने वाली मशीन की फ्रिक्वेंसी और पानी का छिड़काव बढ़ेगा। पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने काम होगा। 450 से अधिक दिल्ली में ट्रकों की एंट्री बंद।

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चार पहिया वाहनों में केवल बीएस 6 इंजन वाले वाहन ही दिल्ली में जा सकेंगे। पीएम-10 को पार्टिकुलेट मैटर कहा जाता है। इससे छोटे कणों का व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या कम होता है। इसमें धूल और धातु के सूक्षम कण मौजूद होते हैं। पीएम-10 और 2.5 धूल, कंस्ट्रक्शन और कूड़ा व पराली जलने से बढ़ते हैं। बाकी हवा की गुणवत्ता के लिहाज से नियमानुसार पाबंदियां लागू की जाएंगी।

प्रदूषण फैलाने वालों पर शुरु की सख्ती

डीसीपी ट्रैफिक गणेश प्रसाद साहा ने बताया कि वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) की जांच सख्त की जाएगी। 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर कार्रवाई की जाएगी। शहर के प्रमुख चौराहों पर टीएसआइ के नेतृत्व में तैनात होंगी। शहर की 50 सड़कें ऐसी हैं जहां ज्यादा भीड़ होती है।

ऐसी सड़क पर विशेष अभियान चलाया जाएगा। सड़क पर चलने वाली वह गाड़ियों जिनसे धुआं निकलता है, वह पर्यावरण के लिए नुकसानदेह होता है। इस तरह के प्रदूषण के लिए पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए जो मानक तय किए गए हैं। उसी हिसाब से कार्रवाई की जाएगी।

शहर में शनिवार दोपहर तीन बजे एक्यूआइ का स्तर

  • क्षेत्र, पीएम-2.5, पीएम-10,
  • सेक्टर-62- 147, 141
  • सेक्टर-125, 56, 159
  • सेक्टर-116, 217, 166
  • सेक्टर-1, 136, 164

Edited By: Pradeep Kumar Chauhan

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