यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 21, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Noida Farmers Protest: राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में न बिगड़े कानून व्यवस्था, इसलिए किसानों पर 5 दिन बाद दर्ज हुआ मुकदमा
मंगलवार को एफआइआर की जानकारी नामजद कुछ किसानों तक पहुंच गई। मुकदमे के लिए 23 जनवरी की तारीख काे क्यों ...और पढ़ें

HighLights
- 18 जनवरी को किसानों ने की थी नोएडा प्राधिकरण के कार्यालय पर तालाबंदी
- प्राधिकरण के जेई की तहरीर पर गुपचुप तरीके से 23 जनवरी को दर्ज की एफआइआर
- एक माह बाद भी काेई कार्रवाई न होने पर सरकारी तंत्र की मंशा पर उठ रहे सवाल
गौरव भारद्वाज, नोएडा। एक तरफ नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ किसानों का धरना प्रदर्शन चरम पर था, दूसरी तरफ 22 जनवरी को अयोध्या में नवनिर्मित मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम था। किसान सड़क पर न आए जाएं, इसलिए 18 जनवरी को पुलिस और किसानों के बीच तालाबंदी को लेकर हुई भिड़ंत के बाद तत्काल कोई कार्रवाई नहीं की।
आरोप है कि किसानों ने राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया, पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला किया, साजिश के तहत सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। माना जा रहा है कि शासन-प्रशासन के बीच लंबी चली मंत्रणा के बाद तय हुआ कि बवाल मचाने वाले किसानों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो, लेकिन 22 जनवरी के बाद हो।
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600-700 अज्ञात के किसानों के खिलाफ मुकदमा
इसके बाद 23 जनवरी को प्राधिकरण के अवर अभियंता अरुण वर्मा द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र के आधार पर कोतवाली फेज-वन में 46 नामजद और 600-700 अज्ञात के किसानों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। एफआइआर की जानकारी किसी को न लगे, इसलिए आनलाइन से लेकर आफलाइन तक सभी रास्ते बंद कर दिए गए, लेकिन मामला ज्यादा दिन छिप न सका।
सरकारी तंत्र की मंशा पर उठ रहे सवाल
मंगलवार को एफआइआर की जानकारी नामजद कुछ किसानों तक पहुंच गई। मुकदमे के लिए 23 जनवरी की तारीख काे क्यों चुना गया, यह तर्क बताने में जिम्मेदार नाकाम हैं। एक माह के भीतर कोई कार्रवाई नहीं की गई, इससे सरकारी तंत्र की मंशा पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।
किसानों के खिलाफ मुकदमा किस उद्देश्य से लिखा गया है, यह भी साफ नहीं हो पा रहा है। डीसीपी विद्या सागर मिश्र का कहना है कि तहरीर मिलने पर मुकदमा दर्ज किया गया। जिसकी विवेचना प्रचलित है।
कितनी गंभीर है धारा 153ए
भारतीय दंड संहिता की धारा 153A ‘धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने और सद्भाव बिगाड़ने’ के मामले में लगाई जाती है। इसमें तीन वर्ष तक के कारावास या जुर्माना या दोनों का प्रविधान है।
राष्ट्रीय सम्मान के अपराध की रोकथाम अधिनियम की धारा 2
कोई भी व्यक्ति जो किसी सार्जनजिक स्थान पर या किसी भी ऐसे स्थान पर सार्वजनिक रूप से भारतीय राष्ट्रीय झंडे या भारत के संविधान या उसके किसी भाग को जलाता है, विकृत करता है, कुचलता है या अपमान करता है। दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक के कारावास, जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
