नोएडा (आशुतोष अग्निहोत्री)।  कोरोना महामारी के कारण पूरे देश में लॉकडाउन है। लोग परेशान हैं। कई लोग शहर छोड़ वापस गांव जा चुके हैं। वहीं , कुछ लोग ऐसे भी हैं जो तमाम मुसीबतों के बीच भी शहर मे टिके हैं। आइए जानते हैं क्‍या कहते ये लोग। 

केस एक : उम्र के साठ दशक देख चुके बिहार के सुपौल निवासी जागेश्वर मुखिया की जेब में मात्र 125 रुपये बचे हैं। लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद उनके परिवार के आठ में से पांच सदस्य वापस गांव लौट चुके हैं, लेकिन जागेश्वर ने हिम्मत नहीं हारी है। वह पत्नी हरदुल देवी के साथ आज भी सेक्टर-63 की झुग्गी बस्ती में डटे हैं। उनके मोहल्ले में 40 लोग रहते थे। अब छह लोग बच गए हैं। बुझे दिल से कहते हैं कि कई बार मन करता है कि सब कुछ छोड़कर हम भी गांव लौट जाएं, लेकिन नोएडा छोडऩे ही हिम्मत नहीं होती। पिछले दस साल में हमने इसे खून-पसीने से सींचा है, यहां का खाका खींचा है, इसे छोड़कर कैसे चले जाएं। लॉकडाउन के 62 दिन गिन-गिन कर काटे हैं। अब तो पाबंदियां हटने लगी हैं। उद्योगों का पहिया घूमने लगा है, बहार आने ही वाली है। खुशियों की सुबह की सुनहरी किरणें फिर हमारे द्वार पर दस्तक देंगी।

केस दो : इसी झुग्गी बस्ती में बिहार के मुजफ्फरपुर जिला निवासी 35 वर्षीय रूना देवी भी रहती हैं। रूना के चार बच्चे हैं, चारों नाबालिग। पति सोहन शाह ने एक साल पहले नोएडा में ही दूसरी शादी कर ली। उसके बाद से वह अपने छोटे भाई अमरजीत के साथ रहती हैं और वही इनके बच्चों की देखरेख करता है। लॉकडाउन में 55 दिनों तक खाली बैठने के बाद आखिर अमरजीत की फैक्ट्री में काम शुरू हो गया है। रूना कहती हैं कि उन्हें भी कई लोगों ने बिहार लौट जाने की सलाह दी थी, लेकिन इस शहर से मिले प्यार ने कदमों को थामे रखा।

यह कहानी भले ही दो परिवारों की है, लेकिन यहां की हर झुग्गी बस्ती में जागेश्वर और रूना जैसे लोग हैं जिनके सपने लॉकडाउन में चकनाचूर हो गए। लॉकडाउन में फैक्ट्रियों में ताले लगे तो इनके चूल्हे की आग भी ठंडी पड़ती गई। इन लोगों ने किसी तरह सामाजिक संगठनों की मदद से गुजारा किया, पर शहर नहीं छोड़ा। अब उम्मीद है कि समय सब कुछ सही कर देगा।

उम्मीद है वापस लौट आएंगे कामगार

नोएडा इंटरप्रिन्योर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विपिन मल्हन कहते हैं कि लॉकडाउन से पहले नोएडा में करीब नौ लाख कामगार काम करते थे जिसमें से 80 फीसद प्रवासी थे। उनमें से 35 से 40 फीसद कामगार पलायन कर चुके हैं। वह कहते हैं कि हम उद्योगों में जल्द से जल्द काम शुरू करने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि श्रमिकों को वापस लाया जा सके। लोगों में डर है कि जून- जुलाई में हालात खराब हो गए और सरकार ने दोबारा से लॉकडाउन बढ़ा दिया तो वे कहीं के नहीं रहेंगे। इनका डर दूर करने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे।

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Posted By: Prateek Kumar

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