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एनसीएलटी रिपोर्ट ने खोली जेपी परियोजनाओं में देरी और अनियमितताओं की पोल, 10 हजार फ्लैट अधर में

Published: Wed, 07 Oct 2026 08:12 PM (IST)

एनसीएलटी द्वारा गठित एक उच्चस्तरीय जांच समिति ने जेपी इंफ्राटेक की परियोजनाओं में सुरक्षा रियल्टी की लापरवाही और देरी का ...और पढ़ें

जेपी की परियोजनाओं हो रही देरी का कमेटी ने खोला चिट्ठा ( एआई जेनरेटेड इमेज )

जेपी की परियोजनाओं हो रही देरी का कमेटी ने खोला चिट्ठा ( एआई जेनरेटेड इमेज )

HighLights

  1. एनसीएलटी जांच समिति ने जेपी इंफ्राटेक परियोजनाओं की ऑडिट रिपोर्ट पेश की।

  2. सुरक्षा रियल्टी की धीमी कार्यप्रणाली से 10,000 फ्लैटों का निर्माण अटका।

  3. रिपोर्ट में गुणवत्ता में कमी और वित्तीय अनियमितताओं का भी खुलासा हुआ।

जागरण संवाददाता, नोएडा। नेशनल कंपनी ला ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) प्रधान पीठ के आदेश पर गठित दो सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति ने जेआइएल (जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड) की परियोजनाओं की ऑडिट रिपोर्ट नेक सुरक्षा रियल्टी के दावों की पोल खोली है।

कमेटी की 90 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट में परियोजना में बरती जा रही लापरवाही, देरी और अनियमितताओं का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया है। कमेटी ने जेपी रियल एस्टेट अलाटीज वेलफेयर सोसायटी (जेआरईएडब्ल्यूएस) की उठाई जा रही शिकायतों की जांच पड़ताल की। 10 हजार फ्लैट का निर्माण अधर में लटका मिला।

कमेटी की रिपोर्ट में धीमी कार्यप्रणाली उजागर हुई

कमेटी की रिपोर्ट से सुरक्षा रियल्टी की धीमी कार्यप्रणाली उजागर हुई है। रिपोर्ट में बताया जून 2024 को जब इंप्लीमेंटेशन एंड मानिटरिंग कमेटी (आइएमसी) भंग हुई और सुरक्षा ग्रुप ने जेपी इंफ्राटेक का प्रबंधन अपने हाथों में लिया। 62 टावरों का 85 प्रतिशत निर्माण कार्य पहले ही पूरा हो चुका था।

15 प्रतिशत फिनिशिंग कार्य छह से 18 महीनों में पूरा कर 6000 खरीदारों को घर देना था। लेकिन, सुरक्षा की ओर से दो वर्ष में 3444 खरीदारों को ही घर की चाबी दी। अधूरे पडे 97 टावरों में 10164 आवासीय इकाइयों का निर्माण कार्य बेहद धीमा मिला। धीमे निर्माण कार्य से खरीदारों को घर मिलने में देरी हो रही है।

संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्र नोएडा, गुणवत्ता पर सवाल

जांच रिपोर्ट में सामने आया कि नोएडा संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्रों में आता है। जेआइएल की 30 से 32 मंजिला इमारतों स्टील के उपयोग में गुणवत्ता के साथ समझौता हुआ है। इसके साथ ही, रिपोर्ट में प्रोजेक्ट मानिटरिंग कमेटी (पीएमसी) में खरीदारों और वित्तीय लेनदारों का उचित प्रतिनिधित्व नहीं होने का जिक्र भी है।

रिपोर्ट ने मासिक प्रगति रिपोर्ट पेश न करने जैसे गंभीर मुद्दे को भी उजागर किया है। रिपोर्ट में में खरीदारों से वसूली जा रही अतिरिक्त ब्याज को गलत और वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता नहीं होने का जिक्र है।

किस्तों का नहीं किया भुगतान

रिपोर्ट के अनुसार सुरक्षा ने यमुना प्राधिकरण को किसानों के अतिरिक्त मुआवजे की किस्तों का भुगतान न किए जाने से जमीन मुद्रीकरण प्रक्रिया अटक गई। आगरा केंसिंग्टन पार्क प्लाट्स परियोजना के खरीदारों को जबरन रिफंड श्रेणी में डालने और अन्य अलाटीज पर मनमाने ढंग से अतिरिक्त शुल्क थोपने की कोशिशें भी उजागर हुई हैं।

कार्रवाई की मांग

जेपी रियल एस्टेट अलाटीज वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष आशीष मोहन गुप्ता ने कहा कि रिपोर्ट ने सुरक्षा की गंभीर लापरवाही और खरीदारों को धोखे में रखने के मामले को पूरी तरह उजागर किया है। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की मांग वेलफेयर सोसायटी की ओर से की गई है।

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