बिहार की बेटी ने ग्रेनो की महिलाओं को बनाया 'रोल मॉडल', मजदूरी करने वाली औरतें ऑनलाइन बेच रहीं खुद के बनाए उत्पाद
नम्रता नारायण ने दादरी और जेवर की ग्रामीण महिलाओं को अचार, पापड़ जैसे उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया है।

नम्रता नारायण ने महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर। यह तस्वीर एआई से एडिट की गई है
HighLights
नम्रता नारायण ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया।
महिलाएं अचार, पापड़ जैसे उत्पाद ऑनलाइन बेच रही हैं।
'मैत्री ऐप' से उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री बढ़ी।
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। जब हौसला बुलंद हो तो हुनर ही रोजगार बन जाता है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है दादरी और जेवर की महिलाओं ने। घर की चारदीवारी में बैठकर अचार, पापड़ और बड़ी बनाने वाली ये महिलाएं आज बाजार में अपनी अलग पहचान बना रही हैं।
इन महिलाओं को पंख दिए हैं नोएडा की समाजसेवी नम्रता नारायण ने। मूल रूप से बिहार की रहने वाली नम्रता बताती हैं कि उनका सपना था ग्रामीण गरीब महिलाओं को स्वावलंबी बनाना। पांच साल पहले उन्होंने दादरी में पहला स्वयं सहायता समूह बनाया और महिलाओं को खाद्य उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिलाया।
पांच से अधिक समूह बना रहे अचार-पापड़
आज पांच से अधिक समूह रोजाना अचार, पापड़ बना रहे हैं। खास बात यह है कि अब इन्हें बाजार तलाशने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि आर्डर खुद चलकर आता है। उत्पादों की गुणवत्ता के कारण बाजारों में इनकी भारी मांग है।
हर महिला को उसके काम का मेहनताना दिया जाता है, जिससे वे परिवार की आर्थिक मदद भी कर रही हैं। नम्रता ने इस काम को डिजिटल भी बना दिया है। उन्होंने मैत्री ऐप बनाया है, जिसके जरिए आनलाइन आर्डर कई गुना बढ़ गए हैं। अब घर बैठे ही डिलीवरी हो रही है और महिलाएं रोल माडल बन गई हैं।
दादरी की सफलता के बाद अब जेवर के गांवों में भी समूह गठित किए जा रहे हैं। नम्रता बताती हैं कि जेवर में जमीन अधिग्रहण के बाद कई गरीब महिलाएं बेरोजगार हो गई थीं, जो खेतों में मजदूरी करती थीं। उन्हें प्रशिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश चल रही है।
