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होम्योपैथिक संस्थान में दवाओं पर रिसर्च को लाए जाएंगे चूहे-खरगोश

सेक्टर-24 स्थित केंद्रीय होम्योपैथिक संस्थान में जल्द ही चूहों पर दवाइयों की रिसर्च शुरू होगी। संस्थान में जानवरों की लैब बनकर तैयार हो चुकी है। जो नए साल तक लैब शुरू हो जाएगी। दवाइयों पर रिसर्च के लिए यहां इस माह करीब 100 चूहे व 50 खरगोश लाए जाएंगे।

By JagranEdited By: Published: Fri, 07 Dec 2018 10:21 PM (IST)Updated: Fri, 07 Dec 2018 10:21 PM (IST)
होम्योपैथिक संस्थान में दवाओं पर रिसर्च को लाए जाएंगे चूहे-खरगोश
होम्योपैथिक संस्थान में दवाओं पर रिसर्च को लाए जाएंगे चूहे-खरगोश

मोहम्मद बिलाल, नोएडा : सेक्टर-24 स्थित केंद्रीय होम्योपैथिक संस्थान में जल्द ही चूहों पर दवाइयों की रिसर्च शुरू होगी। संस्थान में जानवरों की लैब बनकर तैयार हो चुकी है। जो नए साल तक लैब शुरू हो जाएगी। दवाइयों पर रिसर्च के लिए यहां इस माह करीब 100 चूहे व 50 खरगोश लाए जाएंगे। अस्पताल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर मोहन ¨सह ने बताया कि संस्थान में जानवरों की लैब बनकर तैयार हो गई। जानकारी के अनुसार अगले दो हफ्तों में चूहे व खरगोश यहां पहुंच जाएंगे।

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हालांकि अभी यह तय नहीं हो पाया है, कि चूहों पर किन दवाओं की रिसर्च होगी। पर माना जा रहा है कि इन्सेफेलाइटिस, स्वाइन फ्लू, फंगल इंफेक्शन, ओरियंटेशन इंफेक्शन, सांस संबंधित बीमारियों की दवाओं पर रिसर्च होगी। जानवरों की यह लैब रिसर्च के उद्देश्य से बनाई गई है। लैब के फर्श पर पानी का इस्तेमाल नहीं होगा। इसे साफ करने के लिए हल्का गीला कपड़ा इस्तेमाल होगा। कमेटी फॉर द परपज ऑफ कंट्रोल एंड सुपरविजन ऑफ एक्सपेरिमेंट्स ऑन एनिमल (सीपीसीएसईए) से भी लैब के संचालन के लिए सर्टिफिकेट मिल चुका है। डॉक्टर मोहन ¨सह ने बताया कि संस्थान में अभी जेब्रा फिश पर शोध चल रही है। उन्होंने बताया कि अभी होम्योपैथिक दवाओं के जरिए अभी यहां बीपी, शुगर के साथ ही कई गंभीर बीमारियों जैसे किडनी, लीवर, कैंसर, अस्थमा का इलाज किया जा रहा है। एलोपैथी को टक्कर देंगी होम्योपैथी दवाएं

डॉक्टर मोहन ¨सह ने बताया कि ज्यादातर होम्योपैथी दवाओं का असर धीमी गति से होता है। इसलिए त्वरित आराम पाने के लिए मरीज न चाहकर भी एलोपैथी के ही विकल्प को सबसे पहले चुनते हैं। लेकिन एक दशक में होम्योपैथी चिकित्सा का स्वरूप भी अत्याधुनिक हुआ है। इससे अब कई होम्योपैथी दवाएं एलोपैथी की ही तरह तेजी से काम करने लगी हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि होम्योपैथी दवाएं भी एलोपैथी का विकल्प बन सकेंगी।


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