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इंजीनियर की मौत मामले में बिल्डर अभय कुमार गिरफ्तार, CM योगी के संज्ञान पर नोएडा प्राधिकरण के CEO पर गिरी थी गाज

Published: Tue, 20 Jan 2026 03:33 PM (GMT+05:30)Updated: Tue, 20 Jan 2026 04:43 PM (GMT+05:30)

नोएडा के सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज की बेसमेंट के पानी में डूबने से हुई मौत के मामले में बिल्डर अभय ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, नोएडा। उत्तर प्रदेश में नोएडा के सेक्टर-150 में बेसमेंट के पानी में डूबकर हुई इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। नोएडा पुलिस ने नामजद बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। 

नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने रविवार को दो बिल्डर कंपनी एमजे विशटाउन व लोटस ग्रीन खिलाफ मामला दर्ज किया था। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मामले में संज्ञान लिया, जिसके बाद शासन ने नोएडा प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम को हटाकर प्रतीक्षारत कर दिया है, लेकिन अब भी बड़ा सवाल कायम है कि इंजीनियर की मौत के अन्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?

नोएडा प्राधिकरण के सीईओ को पद से हटाया

सेक्टर-150 में एक मॉल के बेसमेंट के लिए की गई खुदाई में भरे पानी में डूबकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की हुई मौत के मामले का सीएम योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। 

नोएडा (न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी) के सीईओ डॉ. लोकेश एम. को पद से हटा दिया गया है। शासन ने उन्हें प्रतीक्षारत कर दिया है। इस मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए मेरठ जोन के एडीजी भानू भास्कर के नेतृत्व में तीन सदस्यीय एसआइटी गठित कर दी गई है। 

एसआईटी में मेरठ के मंडलायुक्त भानू चंद्र गोस्वामी व पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर अजय वर्मा भी शामिल हैं। यह टीम पांच दिनों के अंदर जांच पूरी कर मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपेगी।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि पूरे राज्य में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को चिह्नित कर त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करें। ऐसी कोई घटना दोबारा न हो, इसे हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। प्राधिकरण, दमकल विभाग, पुलिस, एसडीआरएफ की लापरवाही से युवराज की हुई मौत के बाद जिस तरह यूपी के शो विंडो कहे जाने वाले गौतमबुद्ध नगर में अव्यवस्थाओं की पोल खुली, उससे लखनऊ तक तंत्र हिल गया। मुख्यमंत्री सोमवार को दिल्ली में थे तो सीईओ डॉ. लोकेश एम. भी उनसे मिलने गए थे। 

सूत्र बताते हैं कि सीएम इससे नाराज थे कि पिता के सामने युवक डूबता रहा। एक अप्रशिक्षित डिलीवरी ब्वाय पानी में उतर गया, लेकिन प्रशिक्षण प्राप्त बचाव दल ने पानी में उतरना मुनासिब नहीं समझा। बेसमेंट के लिए खोदाई कर उसे खतरनाक स्थिति में छोड़ने वाले बिल्डर पर भी प्राधिकरण ने कार्रवाई नहीं की। 

बताया जाता है कि प्राधिकरण सफाई देता रहा, लेकिन मुख्यमंत्री ने एसआइटी गठित कर दी। कमेटी जांच करेगी कि किस-किस स्तर लापरवाही हुई। बचाव दल युवक को क्यों नहीं बचा सका। जिन स्तर पर लापरवाही बरती गई, उन पर कार्रवाई तय है। कुछ दिन पहले भी एनएमआरसी के कैलेंडर में सिर्फ सीईओ की तस्वीर होने से भी मुख्यमंत्री नाराज थे। इस पर प्राधिकरण के ओएसडी महेंद्र नाथ को प्रतीक्षारत कर दिया गया था। 

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उधर, नोएडा प्राधिकरण के स्तर पर भी कमेटी गठित कर दी गई है। अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (एसीईओ) सतीश पाल ने महाप्रबंधक (सिविल) एके अरोड़ा से अतिशीघ्र जांच रिपोर्ट तलब की है। 

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इसमें कहा गया है कि सिविल, एनटीसी, नियोजन विभाग के तमाम बिंदुओं की जांच की जाए, ताकि दोषियों पर कार्रवाई की जा सके। जांच के दौरान सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के निर्देश का विशेष ध्यान रखा जाए, क्योंकि स्पोर्ट्स सिटी प्रकरण अदालत में विचाराधीन है और यह भूखंड उसमें शामिल है।