जासं, ग्रेटर नोएडा : जेवर के राजकीय बीज भंडार केंद्र पर बृहस्पतिवार को कृषि अधिकारियों ने किसानों के साथ पराली न जलाने को लेकर गोष्ठी आयोजित की। इसमें उप कृषि निदेशक विनोद कुमार व कृषि रक्षा अधिकारी प्रदीप कुमार सिंह ने किसानों से पराली न जलाए जाने की अपील करते की। उप कृषि निदेशक विनोद कुमार ने कम्बाइन हार्वेस्टर मालिकों से कम्बाइन में सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट (एसएमएस) न लगाने पर सीज करने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि यदि बिना सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट के कम्बाइन हार्वेस्टर चलती पाई गई तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिन खेतों में धान की कटाई हो रही है उसमें आग न लगाई जाए। कर्मचारियों को निर्देशित किया कि गांवों में खुली बैठक कर फसल अवशेष जलाए जाने से होने वाले दुष्प्रभावों से ग्रामीणों को अवगत कराया जाए। इस दौरान पराली जलने से पर्यावरण को होने वाले नुकसानों के बारे में भी विस्तार से चर्चा की गई। पराली निस्तारण के लिए शासन द्वारा अनुदान पर उपलब्ध उपकरणों के बारे में भी जानकारी दी। दरअसल पराली जलने से हर साल प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। जिले में पराली जलने के मामले सामने आने लगे है। पराली का धुआं फिर से लोगों का दम न घोंट दे, इसके लिए प्रशासन ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। उप कृषि निदेशक ने कहा कि पराली जलाने वाले किसानों को इस बार सिर्फ अर्थदंड ही नहीं लगेगा बल्कि ऐसे किसानों को शासन की योजनाओं से भी वंचित होना पड़ेगा। हवा हो जाती है जहरीली

किसानों को धान फसल की कटाई और अगली फसल की बुआई के लिए सिर्फ पंद्रह दिनों का समय मिलता है। जल्दबाजी की वजह से किसान पराली जलाने को अधिक पसंद करते हैं। पराली जलाने का सिलसिला 15 अक्टूबर से शुरू हो जाता है, लेकिन इसका सबसे अधिक प्रभाव नवंबर में दिखाई देता है। फसल अवशेषों को आग लगाने से हवा जहरीली हो जाती है। जिसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ता है।

Edited By: Jagran