जागरण संवाददाता, नोएडा :

उत्तर प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग मंत्री जय प्रताप सिंह ने मंगलवार को जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। कई प्रकार की खामियां मिलने पर उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनुराग भार्गव व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वंदना शर्मा को फटकार लगाई। जल्द ही स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश दिए।

स्वास्थ्य मंत्री सुबह करीब 11 बजे जिला अस्पताल के निरीक्षण पर पहुंचे। मंत्री के औचक निरीक्षण से स्वास्थ्य अधिकारियों और डॉक्टरों में हड़कंप मच गया। बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) कक्ष से नदारद डॉक्टर व कर्मचारी अपने कक्ष में पहुंचने लगे। स्वास्थ्य मंत्री जिस वक्त अस्पताल पहुंचे, उन्हें सेवा समाप्त किए जाने से नाराज संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी हड़ताल पर बैठे दिखे। कर्मचारियों की मांग पर अमल करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कर्मचारियों के अनुबंध को आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया और 31 अक्टूबर तक काम करने की अपील की। वेतन संबंधी समस्या के निस्तारण का भी आश्वासन दिया। लेकिन हड़ताली कर्मचारियों ने इसे मानने से इन्कार कर दिया। इसके बाद वह अस्पताल के अंदर पहुंचे। जहां उन्हें पंजीकरण काउंटर के बाहर मरीजों की लंबी कतार लगी दिखी। मंत्री ने सीएमएस डॉ. वंदना शर्मा से इसका कारण पूछा। जिसपर सीएमएस ने बताया कि संविदा कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से स्थायी कर्मचारियों को मरीजों का पर्चा बनाने के काम में लगाया गया है। इसके चलते मरीजों को परेशानी हो रही हैं। मंत्री ने नाराजगी जाहिर करते हुए सीएमएस को निर्देश दिए कि हड़ताली कर्मचारियों से बातचीत करके वापस काम पर लौटने को बोला जाए। जो कर्मचारी काम लौटने से मना करके उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। इसके बाद उन्होंने सीएमएस कक्ष में स्वास्थ्य अधिकारियों व डॉक्टरों के साथ बैठक की।

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निर्माणाधीन नए जिला अस्पताल पर अबतक फैसला नहीं

पत्रकारों से बातचीत में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि, जिले की वर्तमान जनसंख्या के अनुपात में जिला अस्पताल नहीं है, ऐसे में कमियां और खामियां रहेंगी। लेकिन फिर भी अस्पताल में जो खामियां है उसे दूर करने के लिए सीएमओ व सीएमएस को निर्देश दिया है। साथ ही सेक्टर-39 में बन रहे नए जिला अस्पताल के संचालन को लेकर अभी पूरी तरह से विचार नहीं हो सका है। अस्पताल को प्रदेश सरकार संचालित करेगी या केंद्र सरकार इसको लेकर बातचीत की जाएगी। इसके लिए स्थानीय विधायक के अनुरोध पर शासन स्तर से बात जारी है। उम्मीद है कि इस वर्ष के अंत तक इसपर फैसला हो जाएगा।

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दो साल ग्रामीण क्षेत्रों में काम करेंगे एमबीबीएस डॉक्टर

प्रदेश में डॉक्टरों की कमी को लेकर स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रति वर्ष प्रदेश से करीब चार हजार छात्र एमबीबीएस की पढ़ाई करके निकलते हैं। छात्रों से बातचीत कर एक अनुबंध कराने की कोशिश की जा रही है। जिसके तहत एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टरों को कम से कम दो वर्षों तक ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर काम करना अनिवार्य होगा।

Posted By: Jagran

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