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ग्रेटर नोएडा में बढ़ रहा एनर्जी ड्रिंक का चलन, हर माह करीब 15 करोड़ का कारोबार

Published: Tue, 19 May 2026 11:01 PM (IST)

ग्रेटर नोएडा में एनर्जी ड्रिंक का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है, जहां हर महीने 15 करोड़ रुपये से अधिक ...और पढ़ें

नोएडा में एनर्जी ड्रिंक के कारोबार ने युवाओं को अपने स्वाद के जाल में जकड़ना शुरू कर दिया।

नोएडा में एनर्जी ड्रिंक के कारोबार ने युवाओं को अपने स्वाद के जाल में जकड़ना शुरू कर दिया।

HighLights

  1. ग्रेटर नोएडा में एनर्जी ड्रिंक का मासिक कारोबार 15 करोड़।

  2. युवा और छात्र हैं एनर्जी ड्रिंक के सबसे बड़े उपभोक्ता।

  3. स्वास्थ्य विशेषज्ञ एनर्जी ड्रिंक के खतरों के प्रति आगाह कर रहे।

रंजीत मिश्रा, ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्ध नगर औद्योगिक शहर के साथ एजुकेशन हब के रूप में भी जाना जाता है। यहां जितने युवा नौकरीपेशा हैं, उनसे कहीं अधिक छात्र हैं। यहीं कारण है कि जिले में एनर्जी ड्रिंक के कारोबार ने युवाओं को अपने स्वाद के जाल में जकड़ना शुरू कर दिया है।

व्यापारियों के मुताबिक हर माह करीब 15 करोड़ रुपये से अधिक का एनर्जी ड्रिंक का कारोबार जिले में हो रहा है। एजुकेशन और कारपोरेट हब के रूप में तेजी से विकसित होते शहर में एनर्जी ड्रिंक्स की बिक्री में बीते कुछ सालों में जबरदस्त उछाल आया है। गौतमबुद्ध नगर में एनर्जी ड्रिंक और कोल्ड ड्रिंक्स की खपत लगातार रिकार्ड तोड़ रही है।

ड्रिंक्स का बाजार पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ा

यूपी युवा उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष विकास जैन के मुताबिक एनर्जी ड्रिंक्स का बाजार पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ा है। भारत में एनर्जी ड्रिंक का बाजार 2023 में 23,315 करोड़ रुपये का था और 2031 तक 36,325 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

वहीं, जिले में करीब 15 करोड़ से अधिक का कारोबार सिर्फ एनर्जी ड्रिंक हैं। इनके करीब दर्जन भर से अधिक ब्रांड इस समय जिले के विभिन्न बाजारों में बिक रही हैं।

सबसे बड़ा उपभोक्ता युवा और छात्र

वितरक गौरव कुमार का कहना है कि मार्केटिंग और लाइफस्टाइल की वजह से 18-30 साल के युवा सबसे बड़े उपभोक्ता बनकर उभरे हैं। एनर्जी ड्रिंक कंपनियां इन्हें स्पोर्ट्स, एडवेंचर और हाई परफार्मेंस से जोड़कर पेश कर रही हैं।

इससे युवाओं में इनकी छवि कूल और योग्य शीतल पेय की बनती जा रही है। स्कूल, कालेज के छात्र देर रात पढ़ाई और असाइनमेंट के लिए, गेमर्स लंबे समय तक सतर्क रहने के लिए, और जिम जाने वाले प्रि-वर्कआउट ड्रिंक के तौर पर इन्हें ले रहे हैं। एक दुकानदार ने बताया कि हर सप्ताह 12 हजार के करीब एनर्जी ड्रिंक की बोतलें बिकती हैं।

आजकल बाजार में मिलने वाले अधिकांश एनर्जी ड्रिंक्स में अत्यधिक मात्रा में शुगर, कैफीन, कृत्रिम फ्लेवर, केमिकल्स और प्रिजर्वेटिव्स मिलाए जाते हैं। ये कुछ समय के लिए शरीर और दिमाग को एक्टिव महसूस जरूर कराते हैं, लेकिन वास्तव में शरीर को कोई प्राकृतिक ऊर्जा नहीं देते। इनका असर दिमाग और दिल पर पड़ता है। इससे हार्ट संबंधित बीमारी भी होने का खतरा है। लिवर और किडनी को भी अधिक नुकसान होता है। - डॉ. चिराग टंडन, निदेशक इंटरनल मेडिसिन शारदाकेयर हेल्थसिटी

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