ग्रेटर नोएडा में सितंबर में ही छाने लगी दिसंबर जैसी धुंध, साइट-बी की चिमनियों से निकल रहा काला धुआं
ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र साइट-बी में फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं और कचरा जलाने से प्रदूषण खतरनाक स्तर पर ...और पढ़ें

औद्योगिक क्षेत्र साइट बी स्थित इकाई से निकलता धुआं। जागरण
HighLights
फैक्ट्रियों की चिमनियों से काला धुआं, प्रदूषण नियंत्रण यंत्रों की कमी।
कामगारों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन की समस्या।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की लापरवाही, शिकायतों पर कार्रवाई का अभाव।
रंजीत मिश्रा, ग्रेटर नोएडा। अभी सितंबर का करीब आधा माह ही बीता है। नवंबर और दिसंबर आना अभी बाकी है, लेकिन ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में दिसंबर जैसी धुंध छाने लगी है। शहर के औद्योगिक क्षेत्र साइट-बी स्थित फैक्ट्रियों की चिमनियां दिन-रात काला धुआं उगल रही हैं।
आरोप है कि इन ऊंची चिमनियों से निकलने वाले धुएं और प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए मुख्य रूप से इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर और फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन स्क्रबर लगाए जाते हैं।
इससे प्रदूषण कण काफी हद तक नियंत्रित हो जाते हैं हवा में नहीं घुल पाते हैं। प्रदूषण नियंत्रण विभाग इस पर अमल नहीं करा पा रहा है। इससे केमिकल और धुएं के गुबार से पूरा इलाका प्रदूषित हो रहा है, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्राधिकरण आंख मूंदे बैठे हैं।
कामगारों का कहना है कि सुबह-शाम साइट-बी की सड़कों पर धुंध जैसी स्थिति रहती है। सांस लेना मुश्किल हो रहा है। कई इकाइयों में बिना फिल्टर के चिमनियां चल रही हैं। केमिकल की दुर्गंध से आंखों में जलन और सांस की दिक्कत आम हो गई है।
लापरवाही का धुआं
कामगारों को मजबूरी में इसी माहौल में काम करना पड़ रहा है। इलाके में टायर, प्लास्टिक, केमिकल और पेंट की कई इकाइयां हैं। नियमों के अनुसार चिमनियों में प्रदूषण नियंत्रण यंत्र लगाना अनिवार्य है, लेकिन कई फैक्ट्रियों में मानकों का पालन नहीं हो रहा।
शाम ढलते ही कई फैक्ट्रियां चोरी-छिपे कचरा और केमिकल वेस्ट भी जलाती हैं, जिससे प्रदूषण और बढ़ जाता है। कामगारों और उद्यमियों का कहना है कि कई बार इसकी शिकायत के बाद भी प्रदूषण नियंत्रण विभाग आंख मूंदे बैठा है।
पांच दिन पहले इसकी शिकायत प्रदूषण नियंत्रण विभाग से की गई, फिर भी इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस संबंध में क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी विकास मिश्रा का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है।
शिकायतों को भी तत्परता से लेकर जांच कराई जाती है। मानकों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों पर कार्रवाई की जाती है। इस मामले की शिकायत मिली है। मौके का मुआयना कर कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले ही कुछ इकाइयों को पहले नोटिस जारी किए गए हैं।
डूअल सोर्स जेनरेटर भी जरूरी
प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए डूअल सोर्स जेनरेटर के उपयोग का भी प्रविधान किया है। डूअल सोर्स जेनरेटर रेट्रोफिटिंग होता है।
यह एक ऐसी तकनीक है, जिसमें आपके मौजूदा डीजल जेनरेटर को अपग्रेड करके उसे डीजल और गैस (सीएनजी, एलएनजी और पीएनजी) आधारित दोनों ईंधनों पर संचालित किया जाता है। इसे डूअल फ्यूल सिस्टम कहा जाता है।
चंद इकाई पीएनजी और बायोमास से संचालित
- जिले में करीब 30 हजार से अधिक छोटी-बड़ी इंडस्ट्री
- पीएनजी आधारित -74
- बायोमास आधारित -46
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