ग्रेनो आयुष्मान आरोग्य मंदिर की खुली पोल, 8 महीने से एएनएम-आशा गायब; फ्रिज और बैकअप न होने से खराब हो रहीं वैक्सीन
ग्रेटर नोएडा के बिरौंडी स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में स्टाफ और मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ रहा है।

आयुष्मान आरोग्य मंदिर।
HighLights
बिरौंडी आरोग्य मंदिर में स्टाफ और सुविधाओं की भारी कमी।
आठ महीने से एएनएम-आशा न होने से टीकाकरण प्रभावित।
जांच किटों की कमी से मरीजों की जांचें नहीं हो रहीं।
आशीष चौरसिया, ग्रेटर नोएडा। बिरौंडी स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर (स्वास्थ्य उपकेंद्र) में स्टाफ की कमी और मूलभूत सुविधाओं की कमी के चलते आने वाले मरीजों को कई बार बिना उपचार के ही वापस दूसरे अस्पतालों को लौटना पड़ता है।
केंद्र पर बीते आठ महीने से एएनएम और आशा की तैनाती नहीं होने के कारण वैक्सीनेशन का सर्वे प्रभावित होने के साथ ही बच्चों को वैक्सीन नहीं लग पा रही हैं।
वहीं जांच किटों की उपलब्धता नहीं होने के कारण मरीजों की स्वास्थ्य जांचें नहीं हो रही हैं और उन्हें बैरंग लौटना पड़ रहा है। यह स्थिति दैनिक जागरण की ओर से चलाए जा रहे अभियान 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर: व्यवस्था की पड़ताल, मरीजों की आवाज' के तहत की गई पड़ताल में देखने को मिली।
बता दें कि दैनिक जागरण के ओर से की गई पड़ताल में देखने को मिला कि केंद्र के मुख्य द्वार के आसपास स्थानीय लोगों ने निमार्ण सामग्री, मलबा और वाहन खड़े करके कब्जा कर रखा, वहीं दूसरी ओर केंद्र की दीवार से समीप ट्रांसफार्मर रखा हुआ, जिसके वायर खुले हुए केंद्र के अंदर की ओर फैले हुए हैं। इससे हादसों का खतरा बना रहता है।
केंद्र के स्टाफ ने बताया कि कई बार ट्रांसफार्मर में शार्ट-सर्किट होने से आग लगने का खतरा भी बना रहता है। इसके अलावा केंद्र के भवन से प्लास्टर गिरने लगा है। साथ ही कई जगह पर दरारें भी आ गई हैं। इससे हादसे का डर बना हुआ है।
फ्रिज और पावर बैकअप नहीं, वैक्सीन व इंजेक्शन पर असर
केंद्र में फ्रिज और पावर बैकअप की व्यवस्था नहीं होने के कारण टीटी इंजेक्शन के उपयोग में परेशानी हो रही है। बच्चों के टीकाकरण में इस्तेमाल होने वाली वैक्सीन को सुरक्षित तापमान पर रखने में भी दिक्कत सामने आ रही है। इससे टीकाकरण व्यवस्था प्रभावित होने की बात सामने आई है।
केंद्र पर एएनएम और आशा कार्यकर्ता की तैनाती नहीं होने का असर भी टीकाकरण अभियान पर पड़ रहा है। स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले इन कर्मचारियों की कमी के कारण लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं और जागरूकता गतिविधियां प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रही हैं।
जांच की सुविधा नहीं, मरीज दूसरे अस्पतालों के भरोसे
केंद्र पर हेपेटाइटिस, डायबिटीज, डेंगू, मलेरिया और हीमोग्लोबिन, सिफलिस, फाइलेरिया जैसी जांच के साथ ही ब्लड शुगर की जांच भी नहीं हो पा रही है।
ऐसे में केंद्र पर पहुंचने वाले मरीजों को जांच के लिए दूसरे अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों का रुख करना पड़ता है। डायबिटीज की जांच करने वाला ग्लूकोमीटर खराब पड़ा हुआ है।
हीमोग्लोबिन चेक करने के लिए उपयोग होने वाली चिप नहीं है। डेंगू-मलेरिया की जांच के लिए उपयोग होने वाली स्टिक नहीं है। शुगर की स्टिक भी 15 दिनों से नहीं आई है। केंद्र पर सिर्फ नाम मात्र के लिए टीबी और आयोडीन की ही जांच हो रही है।
मुख्य जांचों में उपयोग होने वाले उपकरणों की उच्चाधिकारियों से मांग की गई है। साथ ही केंद्र पर फ्रिज और पावर बैकअप की व्यवस्था कराए जाने के लिए पत्र लिखा गया है। ट्रांसफार्मर को हटवाने या उचित व्यवस्था किए जाने के लिए पत्र लिख चुकी हूं।
- साक्षी, प्रभारी, आयुष्मान आरोग्य मंदिर
