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नाव, रस्सी व जैकेट थीं मौजूद, फिर भी डिलीवरी बॉय मुनेंद्र ने संभाला मोर्चा; हादसे की रात के 'हीरो' को धमका रही पुलिस

Published: Tue, 20 Jan 2026 10:29 PM (IST)

ग्रेटर नोएडा में इंजीनियर युवराज मेहता की कार निर्माणाधीन बेसमेंट में गिरने के बाद, फ्लिपकार्ट डिलीवरी बॉय मुनेंद्र सिंह ने ...और पढ़ें

मीडिया से बातचीत करता मुनेंद्र सिंह एवं घटनास्थल की जांच करती एसआईटी। जागरण

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जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। इंजीनियर युवराज मेहता की कार सेक्टर-150 स्थित टी प्वाइंट पर माॅल के निर्माणाधीन बेसमेंट में जा गिरी थी। फ्लिपकार्ट कंपनी में डिलीवरी ब्वाॅय का काम करने वाले समस्तीपुर निवासी मुनेंद्र सिंह घटना के प्रत्यक्षदर्शी हैं। उन्होंने कड़ाके की सर्दी में बर्फ से जमे पानी में डूबे युवराज को बचाने के लिए जान की परवाह किए बिना करीब 40 मिनट प्रयास किया था। पूरे घटनाक्रम की जानकारी मुनेंद्र सिंह की जुबानी...

पुलिस वालों ने 'धमकाया'

मुनेंद्र ने कहा, 'मेरे स्वजन से पुलिस ने कहा है कि अपने लड़के को कुछ दिन के लिए गायब कर दो। केस समाप्त हाेने के बाद तुम लोगों को यहीं रहना है।' मुनेंद्र का कहना है कि इस बात का डर है कि सिस्टम की लापरवाही और बिल्डरों के खिलाफ आवाज उठाई है, भविष्य में इसका खामियाजा मेरे परिवार को भुगतना पड़ सकता है, लेकिन यदि मैंने सच्चाई का साथ न दिया तो युवराज की आत्मा ऊपर से देख रही होंगी और वह मुझे कभी माफ नहीं करेगी।

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...तो शायद युवराज को बचा लेते

मुनेंद्र का कहना है कि रात करीब 1:45 बजे घटनास्थल पर पहुंचे थे। पुलिस, दमकल व एसडीआरएफ के कर्मी मौजूद थे। कर्मियों के पास सेफ्टी जैकेट, रस्सा और नाव थी, लेकिन सभी पानी में घुसने से डर रहे थे। यदि बचाव दल के सदस्य अंदर पहुंच जाते तो संभवत: युवराज मेहता को बचाया जा सकता था। 

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'सभी फोटो खींच रहे थे'

उन्होंने कहा, 'मेरे पहुंचने से करीब पांच मिनट पहले युवराज डूब चुका था। बचाव दल के सदस्यों के साथ लगभग 150 लोग मौजूद थे। सभी फोटो खींच रहे थे और वीडियो बना रहे थे। 15 दिन पहले ही मैंने इसी स्थान पर गिरे ट्रक ड्राइवर को बचाया था। मुझे बेसमेंट व पानी की गहराई का अंदाजा था। मेरे अंदर युवराज को बचाने का हौसला था।'

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पुलिस ने पहले तो मना किया फिर दी मंजूरी

मुनेंद्र ने कहा कि पहले पुलिस अधिकारियों से अनुमति मांगी तो मना कर दिया गया। फिर मुनेंद्र ने पुलिस को बताया कि गांव के पास से यमुना निकली है, बचपन से ही तैरना आता है। युवक को बचाने का प्रयास करने दीजिए। इसके बाद वह सेफ्टी जैकेट पहन और कमर में रस्सा बांध पानी में कूद गए। इसके बाद लगभग 50 फीट की दूरी तक पानी में 40 मिनट तक युवक की तलाश की।

पुलिस, प्राधिकरण और बिल्डर पर उठाया सवाल

मुनेंद्र ने बताया कि इस बीच बचाव दल के सदस्य टाॅर्च की रोशनी से इधर-उधर तलाश करने के इशारे करते रहे। झाड़ियों समेत आस-पास युवराज को ढूंढने के काफी प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। कार समेत युवक पानी में डूब चुका था। वहीं, ठंड से मुनेंद्र का शरीर सुन्न हो चुका था, इसलिए बाहर आ गया। जांबाज युवा ने बताया कि रविवार को मीडिया के सामने हमने संसाधन होने के बाद भी बचाव दल द्वारा प्रर्याप्त प्रयास नहीं किए जाने की बात कही थी। बिल्डर्स की भी लापरवाही बताई थी।

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