जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा : जेवर के विधायक धीरेंद्र ¨सह के हस्तक्षेप के बाद मायचा गांव में चल रहा किसानों का धरना समाप्त हो गया। विधायक के नेतृत्व में पहले किसानों की ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण सीईओ आलोक टंडन के साथ बैठक हुई। मांगों पर सहमति बनने के बाद विधायक धरना स्थल पर पहुंचे और प्राधिकरण के निर्णय की जानकारी अन्य किसानों को दी। दस फीसद भूखंड आवंटन का प्रस्ताव शासन में लंबित है। प्राधिकरण पर शासन स्तर पर प्रभावी ढंग से दबाव बनाकर प्रस्ताव को मंजूर कराएगा। इसके लिए प्राधिकरण सीईओ ने 31 जुलाई तक का समय मांगा। वहीं मांग पूरी न होने पर किसानों ने एक अगस्त को प्राधिकरण कार्यालय पर तालाबंदी की घोषणा की है।

किसान लंबे समय से अर्जित भूमि की एवज में दस फीसद भूखंड की मांग कर रहे हैं। किसानों ने सभी विस्थापितों को भूखंड देने की मांग की। इसका प्रस्ताव प्राधिकरण ने दो वर्ष पहले शासन को भेजा था। शासन ने अभी तक इस पर निर्णय नहीं लिया है। इसके विरोध में किसान मायचा गांव में धरने पर बैठे हुए हैं। बृहस्पतिवार को जेवर के विधायक किसानों को लेकर प्राधिकरण सीईओ से वार्ता करने पहुंचे। बैठक में सहमति बनी कि आबादी निस्तारण में तेजी लाई जाएगी। बैकलीज के शेष मामले आगामी बोर्ड बैठक में रखे जाएंगे। शि¨फ्टग नियमावली पंद्रह दिन में शासन से मंजूर कराकर किसानों की समस्या का निस्तारण किया जाएगा। किसान नेता राजेंद्र प्रधान व संघर्ष समिति के प्रवक्ता मनवीर भाटी ने बताया कि विधायक ने स्वयं शासन स्तर पर वार्ता कर दस फीसद भूखंड के प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने का वादा किया है, इसलिए धरने को फिलहाल समाप्त कर दिया गया है। सीईओ की वार्ता में किसानों हुए दो फाड़ : जिस समय सीईओ आलोक टंडन के साथ प्राधिकरण कार्यालय में वार्ता चल रही थी, उस समय अन्य किसान संगठन भी वहां पहुंच गए। जिला किसान महासभा के प्रवक्ता रुपेश वर्मा ने कहा कि मायचा गांव में चल रहे धरने में सभी संगठनों ने समर्थन दिया है। सभी की अनुमति के बिना प्राधिकरण के साथ बैठक करना गलत है। उन्होंने सभी संगठनों को एक मंच बुलाने की मांग की। गुर्जर परिषद के अध्यक्ष र¨वद्र भाटी ने कहा कि समर्थन देने वाले किसानों की सहमति के बिना प्राधिकरण के साथ वार्ता नहीं होनी चाहिए। रुपेश वर्मा और र¨वद्र भाटी सीईओ द्वारा दिए गए आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने प्राधिकरण पर गुमराह करने और झूठा आश्वासन देने का आरोप लगाया। बैठक में काफी देर हंगामा हुए। इसके बाद रुपेश वर्मा व र¨वद्र भाटी के नेतृत्व में अनेक किसान बैठक का बहिष्कार कर चले गए। उन्होंने शुक्रवार को सभी संगठनों की बैठक बुलाई है।

Posted By: Jagran

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