गौतमबुद्धनगर में किसानों का खरीदा गेहूं बर्बाद, उठान और भंडारण की कमी बनी समस्या
गौतमबुद्धनगर में किसानों से खरीदा गया 1716 मीट्रिक टन गेहूं ट्रांसपोर्ट और भंडारण की कमी के कारण क्रय केंद्रों पर खुले में पड़ा खराब हो रहा है।

गौतमबुद्धनगर में किसानों से खरीदा गया 1716 मीट्रिक टन गेहूं ट्रांसपोर्ट और भंडारण की कमी के कारण क्रय केंद्रों पर खुले में पड़ा खराब हो रहा है। इमेज एआई
HighLights
1716 मीट्रिक टन गेहूं का उठान अभी बाकी है।
ट्रांसपोर्ट और गोदाम की व्यवस्था न होने से समस्या।
बारिश में भीगकर खुले आसमान में गेहूं बर्बाद हो रहा।
जागरण संवाददाता, जेवर। किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदा गया गेहूं ट्रांसपोर्ट और गोदाम की उचित व्यवस्था न होने के कारण क्रय केंद्रों पर खुले आसमान में बार-बार भीगकर बर्बाद हो रहा है। जिम्मेदार इस गेहूं के उठान के बजाय इसे पूरी तरह से बर्बाद होने का इंतजार कर रहे हैं।
जिले में 23 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं, लेकिन अधिकांश केंद्रों पर गेहूं को रखने के लिए उचित व्यवस्था नहीं है। साधन सहकारी समितियों पर बनाए गए क्रय केंद्रों में खाद के गोदाम भी गेहूं से भरे हुए हैं। किसानों का आरोप है कि गेहूं का उठान न होने से गोदाम खाली नहीं हो पा रहे, जिससे खरीफ की फसलों के लिए समय पर खाद नहीं आ पा रहा है।
गौतमबुद्धनगर में किसानों से एमएसपी पर गेहूं खरीदने के लिए कुल 23 राजकीय क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। 30 मार्च से शुरू हुए क्रय केंद्रों का प्रारंभिक लक्ष्य 17500 मीट्रिक टन रखा गया था, जिसे बाद में संशोधित कर 5500 मीट्रिक टन कर दिया गया। केंद्र शुरू होने के लगभग दो माह बाद 1213 किसानों से 4621.42 मीट्रिक टन की लगभग 84 प्रतिशत खरीद की जा चुकी है।
ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था न होने और एफसीआइ के गोदाम में पहले से जमा धान के कारण गेहूं का उठान समय पर नहीं हो पाया। हाल के दिनों में खराब मौसम के कारण क्रय केंद्रों पर रखा गेहूं बार-बार भीगने से बर्बाद हो रहा है। किसानों से 15 जून तक गेहूं की खरीद की जानी है, लेकिन अब भी जिले भर के क्रय केंद्रों पर 1716 मीट्रिक टन गेहूं का उठान होना बाकी है।
