जागरण संवाददाता, नोएडा:

सेक्टर-127 स्थित फेलिक्स अस्पताल के डॉक्टरों पर इलाज के दौरान लापरवाही का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि डॉक्टरों ने गर्भवती पत्नी का इलाज करते समय पेट में ही तौलिया छोड़ दी। जिससे मरीज की जान को खतरा पहुंचा है। लिहाजा यहां के डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं अस्पताल प्रबंधन ने शिकायतकर्ता के आरोपों को झूठा बताते हुए इसे ब्लैकमेलिग का केस बताया।

मूलरूप से पीलीभीत निवासी डॉ. सलीम खान दिल्ली के शाहीन बाग में रहते हैं। वह फेलिक्स अस्पताल में ही रेजिडेंट डॉक्टर हैं। डॉ. सलीम ने बताया गर्भवती पत्नी डॉ. फरहा खान को प्रसव के लिए 8 मार्च को अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां पत्नी ने बेटी को जन्म दिया। प्रसव के कुछ देर बाद पत्नी के पेट में अचानक से दर्द उठा। इसपर उन्होंने अस्पताल की महिला डॉ. मनीषा तोमर से संपर्क किया, तो उन्होंने सर्जरी के बाद का दर्द बताते हुए कुछ दवा और इंजेक्शन दिए। जिससे थोड़ी देर तक कुछ आराम रहा। इसके बाद 11 मार्च को अस्पताल से मरीज को छुट्टी दे दी गई। लेकिन जब डॉक्टरों के कहने पर दवा खाने के बाद भी पत्नी का पेट दर्द कम नहीं हुआ, तो उन्होंने दिल्ली के सरिता विहार स्थित हिन्द डॉयग्नोसटिक सेंटर से अल्ट्रासाउंड जांच कराई। जिसमें मरीज के पेट में तौलिया होने की बात सामने आई। इसकी शिकायत उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से की, तो मामले को मैनेज करने के लिए रुपये की पेशकश की गई। लेकिन उन्होंने अस्पताल की इस पेशकश को ठुकराते हुए कार्रवाई की बात कहीं। जिसके बाद से उन्हें अस्पताल प्रबंधन की ओर से लगातार धमकियां मिल रही है। पीड़ित ने बताया कि दिल्ली के एक निजी अस्पताल में इलाज कराकर उन्होंने पत्नी के पेट में पड़ी तौलिया को बाहर निकलवाया है।

--

स्वास्थ्य विभाग और पुलिस में शिकायत:

डॉ. सलीम ने बताया कि डॉक्टरों की इस लापरवाही की शिकायत उन्होंने सीएमओ कार्यालय और ग्रेटर नोएडा स्थित सूरजपुर कोतवाली पुलिस से की है। साथ ही दिल्ली स्थित जामिया नगर थाने में अस्पताल के मालिक के खिलाफ धमकी की शिकायत दी है। सीएमओ डॉ. अनुराग भार्गव ने बताया कि उन्हें अभी इस तरह के किसी भी मामले की शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सूरजपुर कोतवाली प्रभारी ने बताया अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ शिकायत मिली है। पीड़ित को आगे की कार्रवाई के लिए सीएमओ कार्यालय भेजा गया है।

---

अल्ट्रासाउंड जांच के बाद मरीज को अस्पताल में भर्ती करने के लिए बोला गया था। लेकिन पति ने मरीज को अस्पताल में भर्ती करने से मना कर दिया। बकाया बिल का भुगतान नहीं करना पड़े। इसलिए अस्पताल को बदनाम करने की साजिश रचते ब्लैकमेलिग की जा रही है।

- डॉ. डीके गुप्ता, निदेशक, फेलिक्स अस्पताल

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप

budget2021