जागरण संवाददाता, नोएडा :

नोएडा की लाइफलाइन नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे पर वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लगा है। पीक आवर में यहां वाहनों की रफ्तार मानक स्पीड से भी धीमी रहती है। इसकी एक बड़ी वजह रि-सरफेसिग और एक्सप्रेस-वे के नीचे तीन अंडरपास का निर्माण कार्य है।

बता दें कि रि-सरफेसिग के लिए वर्तमान में दोगुना से अधिक कामगार लगाए गए है। साथ ही धीमी गति के कारण प्राधिकरण निर्माण कंपनी पर तीन बार में 42 लाख का जुर्माना लगा चुका है। दिसंबर में रिसरफेसिग का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। प्राधिकरण और कंपनी दोनों ही कर रही है। हाट इन प्लेस तकनीक पर एक्सप्रेस-वे की रि-सरफेसिग की जा रही है। एक्सप्रेस-वे दिल्ली को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। नोएडा से ग्रेटर नोएडा और आगरा, लखनऊ जाने के लिए इसी मार्ग का प्रयोग करते हैं। यहां प्रतिदिन लाखों वाहनों की आवाजाही होती है। मरम्मत का कार्य धीमा होने के चलते कंपनी पर दो बार 20-20 लाख और एक बार दो लाख का जुर्माना लगाया जा चुका है। अब यह कार्य 30 दिसंबर 2021 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हाट इन मिक्स तकनीक का किया जा रहा प्रयोग

इसमें सड़क सरफेस को 50 एमएम मोटाई में उखाड़कर मैटेरियल को प्लांट में ले जाया जाता है। आवश्यकता अनुसार नवीन मैटेरियल मिलाकर दोबारा लेयिंग का काम किया जाता है। बिछाई गई लेयर पर 60 एमएम मोटाई में एसएमए का कार्य किया जा रहा है। 40 एमएम की एक लेयर और सड़क पर फाइनल टच के लिए बिछाई जा रही है। इस तकनीक से कार्य करने में लागत में बचत आती है। सड़क की मजबूती कई गुना बढ़ जाती है। इस तरह से तैयार एक्सप्रेस-वे पर सात साल तक किसी प्रकार की मरम्मत करने की आवश्यकता नहीं होगी।

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एक तरफ की लेयिग हो चुकी है पूरी

ग्रेटर नोएडा की ओर से जीरो प्वाइंट से महामाया फ्लाईओवर तक एक लेयिग का कम पूरा किया जा चुका है। नोएडा से ग्रेटर नोएडा की ओर सात किमी तक लेयिग की जा चुकी है। बताया गया कि एडवंट तक कार्य होने के बाद लेयिग का कार्य दिन और रात दोनों समय कराया जाएगा, जिससे तेजी से कार्य पूरा हो सके।

Edited By: Jagran