जागरण संवाददाता, नोएडा : सोसायटियों में मल्टी प्वाइंट कनेक्शन करने की शुरुआत अब बिजली विभाग ने शुरू कर दी है। इसके लिए बिल्डर को पत्र लिखकर परिसर के निरीक्षण करने और उनमें बदलाव के लिए संयुक्त बैठक कर कार्य प्रणाली तय करने की बात कही गई है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा 10 अगस्त को सोसायटियों में निवासियों को खुद का कनेक्शन देने की मंजूरी दे दी थी। सभी फ्लैट धारकों को अपना कनेक्शन मिल जाए इसके लिए 31 मार्च 2019 डेडलाइन रखी गई है।

पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के नोएडा जोन के उपभोक्ताओं के इस फैसले के बाद सबसे अधिक फायदा होने वाला है। नोएडा ग्रेटर-नोएडा में 500 से अधिक सोसायटी हैं। इन सभी में 31 मार्च 2019 तक खुद का कनेक्शन देने की मंजूरी दे दी गई है, लेकिन इससे पहले निगम को सोसायटी के सभी तकनीकी पहलुओं और उपकरणों को जांचना होगा। इसकी शुरुआत सर्किल-1 के तहत डिवीजन-5 ने कर दी है। डिवीजन पांच के अधिशासी अभियंता केके सारस्वत ने बताया कि सेक्टर 135 स्थित टूडेज होम सोसायटी के बिल्डर को पत्र भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि बिल्डर द्वारा सोसायटी में मल्टी प्वाइंट को कराने के लिए कार्य योजना बनानी होगी, जिसे सात दिन के भीतर कार्यालय में पेश करना होगा। इसमें बिल्डर को अपनी विद्युत लाइन के बारे में पूरी जानकारी देनी होगी। साथ ही अब कोई भी बिल्डर और आरडब्ल्यू सोसायटी में कनेक्शन नहीं दे सकेगा। इसके अलावा अन्य कई ¨बदुओं को भी जानकारी दी गई है।

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बिल्डर और आरडब्ल्यूए को इन बातों रखना होगा ध्यान

- सोसायटी के मेन गेट पर मीटर लगाने के लिए मीटर रूम का निर्माण, जिसमें वेंटीलेशन की व्यवस्था

- बैकअप के लिए अलग से वाइ¨रग व मीटर की व्यवस्था

- विद्युत उपकरण जैसे बस-बार, डिस्ट्रीब्यूशन बाक्स आदि की व्यवस्था करना

- कॉमन फेसिलिटी जैसे पार्किंग, लिफ्ट, फायर फाइ¨टग, कारिडोर में विद्युत के लिए अलग से लाइन व मीटर

- लोड के मुताबिक ट्रांसफार्मरों की व्यवस्था

- सभी खरीदारों के नाम, फ्लैट नंबर, क्षेत्रफल, मोबाइल नंबर की जानकारी देना

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मल्टी प्वाइंट होने के बाद आरडब्ल्यूए व बिल्डर की जिम्मेदारी

- परिसर में विद्युत लाइन की पूरी तरह से देखरेख करना

- ट्रांसफार्मरों को सुचारू रूप से चलाना व जरूरत पड़ने पर उसको बदलना

- बस-बार, डिस्ट्रीब्यूशन बॉक्स व मीटर रूम को इंसूलेटेड रखना

- मीटर रूम में लॉग बुक रखना जिसमें मीटर पर लगे सील व निरीक्षण से संबंधित सूचना दर्ज होना

- बैक अप के लिए अलग से मीटर व उसका अलग से बिल जारी करना

Posted By: Jagran