जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा :

इंटरनेट मीडिया से मतदाताओं तक पहुंचना आसान तो है ही बल्कि यह सस्ता और सटीक भी है। यही वजह है कि इस बार विधानसभा चुनाव में उतरे उम्मीदवार परंपरागत प्रचार शैली से ज्यादा इंटरनेट मीडिया को हथियार बना रहे हैं। कोरोना के कारण मतदाता भी मौके की नजाकत जान इंटरनेट मीडिया के सहारे अपनी फरमाइश दावेदारों तक पहुंचा रहे हैं। विधानसभा चुनाव का शंखनाद हो गया है। तारीखों का ऐलान होते ही भावी दावेदार अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं। मतदाताओं को लुभाने के लिए सुबह होते इंटरनेट मीडिया पर अपना प्रचार करना शुरू कर देते हैं। प्रत्याशियों से ज्यादा उनके चहेते व समर्थक चुनाव का परचम लहरा रहे हैं। पार्टी प्रत्याशियों के स्वागत व वोट मांगने के वीडियो व फोटो के साथ क्षेत्र में मिल रहा समर्थन समेत अन्य पार्टी व प्रत्याशी की विचारधारा से जुड़े स्लोगन शेयर करना शुरू कर देते हैं। प्रत्याशियों के चहेतों ने दावेदारों के नाम से ज्यादा से ज्यादा वाट्सएप ग्रुप बनाकर ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं को जोड़ा हुआ है। जिस पर सुबह से लेकर शाम तक चुनावी चर्चा जोरों पर है।

चुनावी मैदान में उतरे तमाम सूरमा पुराने प्रयोगों के साथ-साथ समय के साथ व्यवहार बदलकर मतदाताओं को रिझाने में जुटे हैं। वाट्सएप व फेसबुक दावेदारों के लिए सूचना का बड़ा माध्यम बनकर उभरा है।

-सुरेंद्र सिंह, गौर सिटी इंटरनेट मीडिया मतदाताओं को रिझाने का जरिया बना हुआ है। ऐसा कोई दावेदार नहीं जो वाट्सएप समूहों का गठन कर मतदाताओं को न रिझा रहा हो। चुनाव के दौरान प्रचार का तरीका ही बदल गया है।

सरोज शर्मा, गौर सिटी

कोरोना की वजह से भी प्रत्याशी इंटरनेट मीडिया के सहारे अपनी जीत की इबारत लिख रहे हैं। चुनावी मैदान में उतरे सूरमा बैनर पोस्टर से ज्यादा वाट्सएप, फेसबुक व ट्विटर पर नजर आ रहे हैं।

- रंजीत सिंह, गौर सिटी

Edited By: Jagran