अर¨वद मिश्रा, ग्रेटर नोएडा

ह्यूमन व आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस 2030 तक फार्मूला वन का भविष्य होगा। ऑटो कंपनियां इसका रोडमैप तैयार कर रही हैं। भविष्य की फार्मूला वन कार को ट्रैक पर दौड़ाने में तकनीकी दखल के साथ चुनौती का सामना करने की चालकों की बुद्धिमत्ता की भी भूमिका होगी। ह्यूमन व आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के समावेश के साथ इन कारों का डिजाइन तैयार किया गया है। इसमें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन के मॉडल ने बाजी मारी है। फार्मूला

वन कारों के डिजाइन के लिए यह प्रतियोगिता सियाम व रेनो ने कराई थी।

फार्मूला वन कार में रफ्तार का रोमांच दर्शकों को दीवाना कर देता है। एफ वन ट्रैक पर हवा से बातें करतीं कारों व उसकी रफ्तार देखने के लिए दर्शकों की भीड़ उमड़ पड़ती है। फार्मूला वन रेस में जीत का पूरा दारोमदार फार्मूला वन रेसर पर ही होता है। कार का पूरा नियंत्रण रेसर करता है। लेकिन भविष्य में फार्मूला वन में तकनीकी का दखल बढ़ेगा। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से लैस कारों पर काम शुरू हो चुका है। यह कार 2030 तक एफ वन ट्रैक पर उतर सकती है।

इन कारों के ट्रैक पर उतरने के बाद रेसर पर दबाव कम होगा। लेकिन रेस में आगे जाने के लिए कार को कितने झुकाव से दौड़ाना है या ट्रैक कब बदलना है। इसका फैसला रेसर को अपनी बुद्धिमत्ता से करना होगा। ह्यूमन इंटेलीजेंस का समावेश होने से एफवन रेस का रोमांच व चुनौती कायम होगी। तकनीकी दखल बढ़ने के बाद भी दर्शकों को इसका पूरा लुत्फ मिलेगा। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन के छात्र कुशल कर्पे का कहना है कि फार्मूला वन का भविष्य ह्यूमन व आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का है। इसके अनुरूप कारों की डिजाइन पर काम हो रहा है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन के छात्रों की डिजाइन कार को प्रतियोगिता में पहला स्थान मिला है। वहीं आइआइटी मुंबई की कार को दूसरा स्थान मिला है। ऑटो एक्सपो में सात फरवरी को इन पुरस्कार की घोषणा हुई है। डिजाइन को और परिष्कृत कर कार कंपनियां एफवन कार तैयार करेंगी।

By Jagran