नोएडा [कुंदन तिवारी]। सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट के दोनों टावर एपेक्स-सियान का निर्माण पार्क की जमीन पर किया गया है, लेकिन इस जमीन के साथ प्राधिकरण की अविकसित ग्रीन बेल्ट को भी समाहित कर लिया गया। दरअसल भूखंड आवंटन के बाद प्राधिकरण की अविकसित ग्रीन बेल्ट की चारदीवारी कर वर्क सर्किल (तत्कालीन सीसीडी पांच) की ओर से उद्यान विभाग खंड तृतीय को सौंपा जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

हैरानी बात यह है कि शीर्ष न्यायालय की ओर से दोनों टावर को गिराने का आदेश देने के बाद भी प्राधिकरण अधिकारियों की आंखें नहीं खुली हैं। अब तक प्राधिकरण की कितनी वर्ग मीटर जमीन ग्रीन बेल्ट में थी, उसका आकलन तक नहीं किया गया। मामला उजागर होने पर भूलेख, नियोजन, बिल्डिंग सेल, ग्रुप हाउसिंग, वर्क सर्किल, उद्यान खंड तृतीय एक दूसरे की जिम्मेदारी कहकर पल्ला झाड़ने में जुटे हैं, जबकि एआइटी के सामने ग्रीन बेल्ट पर बिल्डर की ओर से कब्जा करने की पुष्टि हो चुकी है। इसके बावजूद विभागों की ओर से पैमाइश शुरू करने तक का निर्णय नहीं लिया गया।

ड्रोन सर्वे में भी ग्रीन बेल्ट पर कब्जे की बात की पुष्टि हो चुकी है। बता दें कि ग्रुप हाउसिंग भूखंड संख्या-04 सेक्टर-93 का आवंटन और मानचित्र स्वीकृत 2004 से 2012 के बीच हुआ। इसका कुल क्षेत्रफल 54815 वर्ग मीटर है। भूखंड पर 2005, 2006, 2009 व 2012 में समय-समय पर मानचित्र स्वीकृत किया गया। सुपरटेक के आवेदन पर 29 दिसंबर 2006 को पहला रिवाइज प्लान प्राधिकरण ने पास किया। 26 नवंबर 2009 को दूसरा रिवाइज प्लान पास किया गया। वही दो मार्च 2012 को तीसरा रिवाइज प्लान प्राधिकरण ने पास किया।

तीन बार प्लान को रिवाइज करने के बाद भी किसी भी विभाग की नजर अविकसित ग्रीन बेल्ट की जमीन पर नहीं गई। यही नहीं भूखंड आवंटन के दौरान न तो पार्क की जमीन की पैमाइश कराई गई और न ही भू प्रयोग में बदलाव किया गया। इसका आंकड़ा तक प्राधिकरण के पास नहीं है कि आखिर ग्रीन बेल्ट की जमीन कितनी थी, जबकि सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट के लिए दो बार में जमीन आवंटित की गई। पहली बार में 48,263 वर्ग मीटर जमीन आवंटित की गई और दूसरी बार में 6556.5 1 वर्ग मीटर जमीन आवंटित की गई।

दूसरी बार आवंटित भूखंड में ग्रीन बेल्ट शामिल नहीं

सूत्रों ने बताया की दूसरी बार में आवंटित की गई जमीन में ही अविकसित ग्रीन बेल्ट का हिस्सा है। यह कितना है या कितना हो सकता है। इसका भी संज्ञान नहीं लिया गया। सवाल यह है कि क्या यह सब प्राधिकरण द्वारा सुपरटेक को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया। सुपरटेक ने अपने 15 टावरों के खरीदारों को लुभाने के लिए दोनों टावरों के निर्माण से पहले के क्षेत्र को ग्रीन एरिया में दिखाया था, जिस पर आरडब्ल्यूए ने आपत्ति दर्ज कराई थी।

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Edited By: Vinay Kumar Tiwari