ला रेजिडेंसिया सोसायटी में न फायर NOC, न एसटीपी; इलाहाबाद HC ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के CEO को किया तलब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट की ला रेजिडेंसिया सोसायटी में अनियमितताओं पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने ग्रेटर ...और पढ़ें

ला रेसिडेंशिया सोसायटी।
HighLights
ला रेजिडेंसिया सोसायटी में अनियमितताओं पर हाईकोर्ट सख्त।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण सीईओ को कोर्ट में पेश होने का आदेश।
बिल्डर ने बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट फ्लैटों का कब्जा दिया।
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की ला रेजिडेंसिया सोसायटी में अनियमितताओं को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कड़ा रूख अख्तियार किया है।
कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ को पेश होने का आदेश दिया है। सोसायटी के लोगों ने बताया कि यह आदेश 10 सितंबर को जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने फ्लैट आवंटी माधवी त्यागी की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनूप कुमार ने पैरवी की। याचिका में आरोप है कि बिल्डर ला रेजीडेंसिया डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड बिना सेल डीड और बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट के ही फ्लैटों का कब्जा दे रहा है, जो यूपी औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम 1976 और भवन विनियमावली 2011 का सीधा उल्लंघन है।
प्रोजेक्ट में फायर एनओसी तक नहीं ली गई
इतना ही नहीं, प्रोजेक्ट में फायर विभाग की एनओसी तक नहीं ली गई है और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) भी अभी तक शुरू नहीं हुआ है, जिससे सुरक्षा और रहने योग्यता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
याचिकाकर्ता ने बताया कि 3 जुलाई 2025 और 21 जनवरी 2026 को ग्रेटर नोएडा को लिखित शिकायत देकर इन गड़बड़ियों की जानकारी दी गई थी, लेकिन प्राधिकरण ने कोई कार्रवाई नहीं की और सिर्फ बिल्डर को कंप्लीशन सर्टिफिकेट लेने के लिए नोटिस जारी कर औपचारिकता पूरी कर ली।
दो ने दिए हैं दो बड़े निर्देश
अधिवक्ता अनूप कुमार ने कोर्ट में दलील दी कि प्रोजेक्ट रेरा में रजिस्टर्ड है और रेरा में शिकायत लंबित होने के बावजूद सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की चुप्पी चिंताजनक है, इसलिए हाईकोर्ट का हस्तक्षेप जरूरी है।
इस पर कोर्ट ने दो बड़े निर्देश दिए हैं पहला ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कोर्ट में उपस्थित होकर बताएं कि अधिनियम के अनुपालन में प्राधिकरण क्यों विफल रहा।
दूसरा, बिल्डर को उसके दिल्ली स्थित रजिस्टर्ड आफिस और टेकजोन-4 स्थित साइट आफिस दोनों जगह नोटिस भेजा जाए। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
