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नोएडा हिंसा में इलाहाबाद HC का बड़ा फैसला, DU छात्रा पर NSA कार्रवाई रद, जानें क्यों अभी जेल में ही रहेगी आकृति

Published: Fri, 04 Sep 2026 02:39 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा श्रमिक हिंसा मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी पर लगी रासुका (NSA) को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है।

आकृति चौधरी। फाइल फोटो

आकृति चौधरी। फाइल फोटो

HighLights

  1. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने DU छात्रा आकृति चौधरी पर लगी रासुका रद्द की।

  2. आकृति को 11 में से 6 मामलों में अभी जमानत नहीं मिली है।

  3. पुलिस पर सृष्टि गुप्ता के घर मोबाइल प्लांट करने का आरोप।

जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर में अप्रैल में हुए श्रमिक हिंसा मामले में आरोपित दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी पर हुई राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई अवैध करार देते हुए रद कर दी है।

फिलहाल आकृति के खिलाफ अलग-अलग कोतवाली में 11 मामले दर्ज हैं। इनमें से पांच में जमानत मिल चुकी है, जबकि छह में निचली अदालत से जमानत नहीं मिली है। मामले में आरोपित की ओर से हाई कोर्ट में अपील की गई। ऐसे में हाई कोर्ट से जमानत नहीं मिलने तक आरोपित को जेल में ही रहना होगा।

कौन आरोपी कितने मामलों में जेल में?

बता दें श्रमिक हिंसा मामले में गिरफ्तार आरोपिताें पर 11 मामले दर्ज हैं। सभी आरोपित वर्तमान में जेल में है। इनमें एक्टिविस्ट सत्यम वर्मा लखनऊ निवासी हैं। उन्हें चार मामलों में जमानत मिल चुकी है। आकृति को पांच मामलों में जमानत मिली है।

आकृति के अलावा सत्यम वर्मा पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) लगाया गया था। इसी तरह आदित्य आनंद को छह मामलों में जमानत मिली है। उत्तराखंड के हिमांशु ठाकुर दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र को आठ मामलों में जमानत मिली है।

रूपेश राय को छह मामलों में जमानत मिली है। इसी तरह डीयू के छात्र योगेश मीणा भी 10 मामलों में आरोपित हैं और अभी जेल में हैं। सृष्टि गुप्ता को छह मामलों में जमानत मिली है। मनीषा चौहान फैक्टरी श्रमिक हैं। उन्हें आठ मामलों में जमानत मिली है।

सृष्टि के घर पर मोबाइल फोन प्लांट करने की कोशिश करने का दावा

श्रमिक हिंसा में गिरफ्तार आरोपित सृष्टि गुप्ता के अधिवक्ता का आरोप है कि गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उनके दिल्ली स्थित छतरपुर घर पर सबूत प्लांट करने की कोशिश की।

इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित सीसीटीवी फुटेज में पुलिसकर्मी सृष्टि का पहले से जब्त मोबाइल फोन उनके घर में रखने की कोशिश करते दिख रहे हैं, लेकिन सीसीटीवी देख यह कोशिश छोड़ दी गई।

एक अन्य क्लिप में सादे कपड़ों में एक व्यक्ति सीसीटीवी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते दिख रहा है। दोनों फुटेज 25 अप्रैल का होना का दावा किया जा रहा है।

दैनिक जागरण नहीं करता सीसीटीवी की पुष्टि

फिलहाल दैनिक जागरण सीसीटीवी की पुष्टि नहीं करता है। सृष्टि को 11 अप्रैल को बोटेनिकल गार्डन से गिरफ्तार किया गया था।

आरोप है कि पुलिस अदालत में यह साबित करने की कोशिश कर रही है कि सृष्टि को नोएडा मेट्रो स्टेशन से मनीषा चौहान और रूपेश के साथ हिरासत में लिया गया, जबकि असल कहानी अलग है।

सृष्टि की बहन और जीजा ने पहले से पुलिस छापे की आशंका में सीसीटीवी लगवाए थे। 25 अप्रैल को पुलिस सृष्टि को उनके घर ले गई कथित रूप से फोन प्लांट करने के लिए, लेकिन सीसीटीवी देखकर पकड़े जाने पर केस डायरी में लिखा गया कि फोन नहीं मिला।