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छोटी कंपनियों का नुकसान से बचाएगा AI 'डाटा ब्रिज', यूपी ट्रेड शो में छाया AKTU के छात्र का सॉफ्टवेयर

Published: Sat, 26 Sep 2026 09:19 AM (IST)

एकेटीयू के पूर्व छात्र नीतीश ने स्प्राइटऐरा के सहयोग से एआई-युक्त 'डाटा ब्रिज' सॉफ्टवेयर विकसित किया है, जो छोटी कंपनियों को उत्पादन प्रक्रिया में होने वाले नुकसान से बचाएगा।

एकेटीयू के पूर्व छात्र नीतीश ने स्प्राइटऐरा के सहयोग से एआई-युक्त 'डाटा ब्रिज' सॉफ्टवेयर विकसित किया है। फोटो: जागरण

एकेटीयू के पूर्व छात्र नीतीश ने स्प्राइटऐरा के सहयोग से एआई-युक्त 'डाटा ब्रिज' सॉफ्टवेयर विकसित किया है। फोटो: जागरण

HighLights

  1. एआई 'डाटा ब्रिज' छोटी कंपनियों को उत्पादन नुकसान से बचाएगा

  2. उत्पादन प्रक्रिया की वास्तविक समय में निगरानी और डेटा प्रबंधन

  3. तापमान, मशीन स्थिति की जानकारी, महंगे उपकरणों पर निर्भरता कम

आशीष चौरसिया, ग्रेटर नोएडा। छोटी और स्टार्टअप कंपनियों को उत्पादन प्रक्रिया के दौरान होने वाले नुकसान से बचाने के लिए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय एकेटीयू (एकेटीयू) से पढ़ाई कर चुके नीतीश ने स्प्राइटऐरा कंपनी के सहयोग से AI युक्त ‘डाटा ब्रिज’ सॉफ्टवेयर विकसित किया है।

यह सॉफ्टवेयरउत्पादन के दौरान तापमान समेत विभिन्न स्तरों पर होने वाली गतिविधियों की जानकारी रियल टाइम में स्क्रीन पर उपलब्ध कराएगा।

साथ ही उत्पादन से जुड़ा पूरा डाटा डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने में भी मदद करेगा। इस सॉफ्टवेयरको नालेज पार्क स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंडमार्ट में आयोजित उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में प्रदर्शित किया गया है।

दरअसल, कई छोटी कंपनियों में उत्पाद तैयार करने के दौरान तापमान, मशीनों की स्थिति और अन्य तकनीकी मानकों की लगातार निगरानी जरूरी होती है। इसके लिए बड़े स्तर पर इंक्यूबेटर और निगरानी प्रणाली स्थापित करनी पड़ती है।

इसकी लागत अधिक होने के कारण छोटी कंपनियां अक्सर इस तरह की तकनीक का उपयोग नहीं कर पातीं। ऐसे में उत्पादन प्रक्रिया के दौरान किसी स्तर पर मानक में बदलाव होने की जानकारी समय पर नहीं मिल पाती और कंपनियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। डाटा ब्रिज सॉफ्टवेयरइस समस्या का तकनीकी समाधान उपलब्ध कराने का प्रयास है।

इसमें AI की मदद से उत्पादन प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न मानकों का डाटा एक जगह एकत्र किया जा सकेगा। तापमान में बदलाव या किसी अन्य पैरामीटर में निर्धारित स्तर से अंतर आने पर उसकी जानकारी रियल टाइम में स्क्रीन पर देखी जा सकेगी। इससे उत्पादन प्रक्रिया की निगरानी आसान होगी और समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे।

महंगे उपकरणों पर निर्भरता होगी कम 

नीतीश के मुताबिक, अभी तक उत्पादन प्रक्रिया की निगरानी और डाटा सुरक्षित रखने के लिए कंपनियों को अलग-अलग उपकरण और इंक्यूबेशन सिस्टम लगाने पड़ते हैं। इनकी लागत अधिक होने के कारण छोटे उद्योगों के लिए इन्हें लगाना मुश्किल होता है।

डाटा ब्रिज को इस तरह तैयार किया गया है कि सीमित संसाधनों वाली कंपनियां भी उत्पादन से संबंधित जरूरी जानकारी को डिजिटल तरीके से मॉनिटर और सुरक्षित रख सकें।

नुकसान रोकने के साथ डाटा भी रहेगा सुरक्षित 

सॉफ्टवेयरकी मदद से उत्पादन के दौरान होने वाले बदलावों का रिकार्ड तैयार किया जा सकेगा। इससे किसी उत्पाद के निर्माण में समस्या आने पर उसके कारणों का विश्लेषण करने में भी मदद मिलेगी।

उत्पादन से संबंधित पुराना डाटा सुरक्षित रहने के कारण कंपनियां भविष्य में उसका उपयोग प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए कर सकेंगी। तकनीक के व्यावहारिक उपयोग से छोटी कंपनियों और स्टार्टअप को उत्पादन प्रक्रिया की निगरानी, डाटा प्रबंधन और संभावित नुकसान को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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