संवाददाता, ग्रेटर नोएडा : ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे के निर्माण को लेकर जमीन पर कब्जा लेना आसान नहीं होगा। वैसे पेरीफेरल का निर्माण मार्च 2009 में शुरू हो जाना चाहिए था, लेकिन अभी तक निर्माण नहीं शुरू हुआ और जल्द शुरू होने की उम्मीद भी नहीं लग रही है। किसान किसी भी कीमत पर जमीन पर कब्जा देने को तैयार नहीं हो रहे हैं। नए जमीन अधिग्रहण कानून के लागू हो जाने के बाद जमीन पर कब्जा लेना और मुश्किल भरा कदम साबित होगा।

गौरतलब है कि दिल्ली में बढ़ते वाहनों के दबाव को देखते हुए राष्ट्रीय राजधानी के चारों तरफ ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे बनाने का निर्णय 2007 में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने यह निर्णय लिया था। एक्सप्रेस-वे हरियाणा के सोनीपत जिले से शुरू होकर बहादुरगढ़, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, फरीदाबाद, गुड़गांव व पानीपत आदि की सीमा से होते हुए वापस सोनीपत पहुंचेगा। इसकी लंबाई 135 किलोमीटर होगी और यह छह लेन का होगा। एक्सप्रेस-वे के निर्माण पर करीब 27 सौ करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। एक्सप्रेस-वे के लिए छह जिलों की 957 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया है। इनमें गौतमबुद्धनगर जिले के सबसे ज्यादा 16 गांवों की कुल 737 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया 2008 में शुरू हो गई थी। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने जिला प्रशासन के माध्यम से 16 गांवों की जमीन का अधिग्रहण भी कर लिया है, लेकिन फिलहाल राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को जमीन पर कब्जा नहीं मिल पाया है। किसान ग्रेटर नोएडा की तर्ज पर मुआवजा व अन्य सुविधाएं की मांग कर रहे हैं। जिला प्रशासन व राष्ट्रीय राज मार्ग प्राधिकरण अधिकारियों के साथ किसानों की कई दौर की बैठक हो चुकी है। किसानों ने ग्रेनो के 39 गांवों की तर्ज पर 64.7 फीसद अतिरिक्त मुआवजा व दस फीसद विकसित भूखंड देने की मांग करने लगे हैं। नए जमीन अधिग्रहण का मसौदा केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूर होने के बाद अब किसान सर्किल रेट का छह गुना मुआवजा देने की मांग उठाने लगे हैं। ऐसे में अब एक बार फिर पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे के निर्माण में बाधा शुरू हो गई है।

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