मुजफ्फरनगर, जेएनएन। बारिश की बंदू-बूंद सहेजने के लिए भागीरथी प्रयास सार्थक हो रहा है। जीर्णोद्धार से तालाबों में बारिश का पानी संचय हुआ हैं। इससे भू-गर्भ स्तर बढ़ रहा है। इसके सहारे धरती की कोख सूखने से बचेगी और गिरता भू-जल स्तर रुकेगा। जल संरक्षण की इस मुहिम से तालाब बारिश के पानी से लबालब है।

जल का अत्यधिक दोहन होने से जल स्तर तेजी से गिर रहा है। तालाबों की स्थिति बेहद खराब और उनकी संख्या में कमी और जल दोहन इसकी मुख्य वजह है। भविष्य के लिए जल संकट को देखते हुए सकारात्मक कदम उठाए। पर्यावरण संतुलन को जीवंत रखने को उठाए कदम के सुखद परिणाम दिखाई पड़ रहे हैं। बता दें कि देहात क्षेत्र में बारिश के पानी संचय के लिए तालाबों की खोदाई कराकर उनका जीर्णोंद्वार कराया गया। हरियाली के लिए तालाबों के चारों ओर छायादार पौधे लगाए गए। धरती की प्यास बुझाने के लिए सफाई व खोदाई होने से बारिश के पानी से तालाब लबालब है। ब्लाक क्षेत्र में वैटलैंड के तहत तालाबों को चिह्नित किया गया था। महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार योजना के तहत महिला और पुरुष श्रमिकों से दलदलीय तालाबों की खोदाई और साफ-सफाई कर उनको पुर्नजीवन दिया गया। तालाबों में पानी को संचय होने से गिरते भू-जल को उठाने में सहायक साबित हो रहे है।

---

बारिश से तालाबों में हुआ जल संचय

खतौली: गंगधाड़ी ग्राम पंचायत अधिकारी केपी सिंह व जसौला ग्राम पंचायत सचिव पंकज सिद्धार्थ का कहना है कि तालाबों को जल संरक्षण के योग्य बनाया गया है। उनका कायाकल्प किया है। उसने चारों ओर पौधे लगवाएं गए हैं। तालाबों में बारिश के पानी का संचय हो रहा है। उनमें जल संचय होने से जल स्तर उठेगा और भू-जल गिरने से बचेगा। इस मुहिम के तहत तालाबों के सहारे गिरते भू-जल को उठाने का बीड़ा उठाया गया है।