थप्पड़ प्रकरण: पीड़ित बच्चे की पढ़ाई को UP सरकार से मिले 1.38 लाख, इस मामले में तुषार गांधी ने SC में दाखिल की थी याचिका
मुजफ्फरनगर में 2023 में हुए थप्पड़ प्रकरण के पीड़ित छात्र की पढ़ाई के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 1.38 लाख ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
मुजफ्फरनगर के स्कूल में पढ़ रहे छात्र की वार्षिक फीस समेत यातायात खर्च व अन्य शैक्षणिक जरूरतें पूरी होंगी।
सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है प्रकरण, शासन से धनराशि मिलने से बेसिक शिक्षा विभाग को मिली राहत।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरनगर। अगस्त 2023 में हुए थप्पड़ प्रकरण के पीड़ित छात्र की पढ़ाई, यातायात, ड्रेस, मोजे और किताब-कापी का खर्च अब शासन वहन करेगा। अभी तक स्कूल फीस का खर्च सैय्यद मुर्तजा मेमोरियल ट्रस्ट उठा रहा था।
शासन से 1.38 लाख रुपये जारी हुए हैं। जिससे बच्चे की वार्षिक फीस समेत यातायात खर्च व अन्य शैक्षणिक जरूरतों को पूरा किया जाएगा। इससे बेसिक शिक्षा विभाग ने राहत की सांस ली है।
शहर की नामचीन शिक्षण संस्था शारदेन में थप्पड़ प्रकरण से पीड़ित बच्चा पढ़ रहा है। उनके पिता प्रतिदिन बाइक से लगभग 40 किमी दूरी तय करके सुबह स्कूल लाते हैं और अवकाश के बाद वापस ले जाते हैं।
प्रतिदिन 200 रुपये के हिसाब से बेसिक शिक्षा विभाग यातायात खर्च वहन कर रहा है। फीस की जिम्मेदारी लेने वाले सैय्यद मुर्तजा मेमोरियल ट्रस्ट ने फीस जमा नहीं की। जिसके चलते बीएसए ने शासन को पत्र भेजा था।
बीएसए संदीप कुमार ने बताया कि शासन से छात्र की फीस और यातायात समेत अन्य शैक्षणिक जरूरतों के लिए धनराशि मिली है। स्कूल को फीस भेजी जा रही है। बच्चे के अभिभावक को 200 रुपये प्रति स्कूली दिन के आधार पर यातायात खर्च दिया जा रहा है।
शासन से मिले बजट में यातायात खर्च भी शामिल है। इसके अलावा ड्रेस, स्टेशनरी, पाठ्य सामग्री आदि को इसी बजट में समायोजित किया जाएगा।
यह था थप्पड़ प्रकरण
खुब्बापुर गांव के निजी स्कूल में अगस्त 2023 को शिक्षिका तृप्ता त्यागी ने पहाड़ा नहीं सुनाने पर एक छात्र को दूसरे छात्र से थप्पड़ मरवाए थे। पीड़ित छात्र का दूसरे छात्र ने वीडियो बना लिया था। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने पर शिक्षिका के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में पीड़ित छात्र का मनपसंद स्कूल में दाखिला समेत शिक्षा का खर्च वहन करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिए थे। मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
