रामपुर तिराहा कांड : सजा के बाद न्यायालय में दाखिल की जमानत याचिका, तीनों दोषियों को मुचलके पर छोड़ा
UP Crime Cases: लगभग 32 साल बाद रामपुर तिराहा कांड से जुड़े फर्जी हथियार बरामदगी मामले में न्यायालय ने तत्कालीन ...और पढ़ें

रामपुर तिराहा कांड के दौरान आंदोलनकारियों के वाहनों से फर्जी हथियार बरामदगी के दोषी ब्रजकिशोर व आरक्षी (वर्तमान में दारोगा) उमेश कुमार। तत्कालीन झिंझाना थाने का आरक्षी अनिल कुमार। जागरण
HighLights
32 साल बाद रामपुर तिराहा कांड पर कोर्ट का फैसला।
तत्कालीन एसओ व दो सिपाहियों को डेढ़ साल की सजा।
फर्जी हथियार बरामदगी मामले में 21-21 हजार का जुर्माना।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड के सरकार बनाम ब्रजकिशोर प्रकरण में एसीजेएम-प्रथम के न्यायाधीश डा. देवेंद्र सिंह फौजदार ने झिंझाना थाना के तत्कालीन एसओ ब्रजकिशोर, सिपाही अनिल कुमार व उमेश चंद को फर्जी हथियार बरामदगी के मामले में डेढ़-डेढ़ साल की सजा सुनाई थी। मंगलवार को तीनों दोषियों को निजी मुचलका भरने पर छोड़ा गया।
बुधवार को तीनों दोषियों ने स्थायी जमानत के लिए 25-25 हजार रुपये के जमानती दाखिल किए। उसके बाद तीनों को जमानत पर रिहा किया गया। हालांकि अपनी सजा के विरुद्ध तीनों आरोपित जिला जज के न्यायालय में अपील कर सकते हैं।
रामपुर तिराहा कांड से जुड़े फर्जी हथियार बरामदगी के मामले में मंगलवार को एसीजेएम-प्रथम, विशेष न्यायालय सीबीआइ के न्यायाधीश डा. देवेंद्र फौजदार ने झिंझाना के तत्कालीन एसओ ब्रजकिशोर निवासी प्रताप विहार, गाजियाबाद, आरक्षी अनिल कुमार निवासी शास्त्रीनगर, मेरठ तथा आरक्षी उमेशचंद निवासी मेरठ पुलिस लाइन को डेढ़-डेढ़ साल की सजा के साथ 21-21 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
मंगलवार को तीनों दोषियों को निजी मुचकला पर छोड़ा गया था। बुधवार को तीनों पुलिस कर्मियों ने स्थायी जमानत के लिए 25-25 हजार रुपये के जमानती दाखिल किए। उसके बाद न्यायालय ने जमानत देकर तीनों को रिहा कर दिया।
राधा मोहन द्विवेदी में आठ जुलाई को सुनवाई
रामपुर तिराहा कांड के सरकार बनान राधा मोहन द्विवेदी प्रकरण में आठ जुलाई को सुनवाई होगी। इस मुकदमे में सीबीआइ द्वारा दाखिल प्रतिलिपि पर सुनवाई चल रही है। बचाव पक्ष प्रतिलिपि को सही नहीं ठहरा रहा है। हालांकि इस मामले में इंस्पेक्टर राधा मोहन द्विवेदी समेत 19 पुलिस कर्मी आरोपित हैं। महिलाओं ने छेड़छाड़ एवं दुष्कर्म के आरोप लगाए थे। वहीं एसपी मिश्रा प्रकरण में सुनवाई चल रही है।
यह था मामला
एक अक्टूबर 1994 को पृथक राज्य की मांग के लिए देहरादून से दिल्ली जाते समय आंदोलनकारियों को छपार थाना क्षेत्र में रामपुर तिराहा पर रोक लिया गया था। देर रात पुलिसकर्मियों ने आंदोलनकारियों पर फायरिंग की थी। इसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। साथ ही महिलाओं से दुष्कर्म का भी आरोप लगा था। इस मामले में सीबीआइ की ओर से सात मुकदमे दर्ज कराए गए थे।
