जेएनएन, मुजफ्फरनगर। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर बीते दिनों राजकीय इंटर कालेज के मैदान में हुई महापंचायत से किनारा करने वाले गठवाला खाप के चौधरी राजेंद्र सिंह ने कहा कि असली महापंचायत आज हुई है। किसान खुले मैदान में जमीन पर बैठे हैं। देश में सरकार उसकी रहेगी जो अन्नदाता के बारे में सोचेगा।

गठवाला खाप के मुखिया राजेंद्र सिंह का मंच पर जोरदार स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सम्मान करते हैं। वैसे भी राजा का विरोध विद्रोह है। हम विद्रोही नहीं हैं। किसान केवल अपनी मांग रख रहे हैं। सरकार को किसानों की सोचनी चाहिए। किसानहित में यदि जल्द ही घोषणा नहीं हुई तो एक सप्ताह बाद आगे की रणनीति के लिए निर्णय लिए जाएंगे। ऐसा भी हो सकता है कि लखनऊ में धरना देना पड़े। उन्होंने कहा कि आज की महापंचायत में खुला मंच है, टेंट है न संसाधन। आज जो महापंचायत में आए हैं वह पीड़ित किसान हैं। सरकार को कम से कम 20 पैसे प्रति किलो प्रति साल के हिसाब से गन्ना मूल्य बढ़ाना चाहिए। इस हिसाब से कम से कम 80 रुपये बढ़ाने चाहिए। महंगाई बढ़ रही है, बिजली के दाम आसमान पर हैं। बिजली विभाग में बगैर पैसे कुछ नहीं होता है। बेसहारा पशु और बेसहारा गोवंश किसान के लिए बड़ी समस्या हैं। किसान का उत्पीड़न या अपमान हुआ तो हम भी तैयार हैं।

किसान नेता संजीव त्यागी ने कहा कि चार साल से गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाया गया, इसे ध्यान में रखते हुए दाम तय किया जाएं। किसान खेत में मेहनत-मजदूरी करता है। गन्ने का दाम तीन-सवा तीन रुपये किलो है, इस दाम में मिट्टी भी नहीं मिलती है। गन्ने पर लगातार लागत बढ़ रही है। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिद मजदूर किसान समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजपाल सिंह ने की।

गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी ऊंट के मुंह में जीरा : चौ. नरेश टिकैत

जेएनएन, मुजफ्फरनगर। प्रदेश सरकार की गन्ना मूल्य में 25 रुपये की वृद्धि की घोषणा पर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने बढ़ोतरी को नाकाफी बताया है।

टिकैत ने कहा कि गन्ना मूल्य में वृद्धि ऊंट के मुंह में जीरा जैसी है। सपा सरकार में 100 रुपये से अधिक की मूल्य वृद्धि हुई थी। वहीं बसपा सरकार में 65 रुपये बढ़ाए गए थे, जबकि भाजपा सरकार में कुल 35 रुपये ही बढ़ाया गया है। साढ़े चार वर्ष में महंगाई बढ़ी है। डीजल, पेट्रोल, खाद्य, तेल सब महंगा हो गया है। उसी के अनुपात में गन्ना मूल्य में भी वृद्धि की जानी चाहिए।

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