हैदरपुर वेटलैंड में दुर्लभ इंडियन ग्रास बर्ड की वापसी, संरक्षण पर चिंता
हैदरपुर वेटलैंड में अत्यंत दुर्लभ इंडियन ग्रास बर्ड की मौजूदगी से पक्षी प्रेमियों में खुशी है, लेकिन इसके घटते सुरक्षित आवास पर चिंता भी जताई गई है।

HighLights
हैदरपुर वेटलैंड में अत्यंत दुर्लभ इंडियन ग्रास बर्ड की मौजूदगी।
पक्षी प्रेमियों में खुशी, पर आवास घटने से चिंता।
अमेरिकी बर्ड वाचर चार्ली डेविस ने किया अवलोकन।
सोनू धीमान, मीरापुर (मुजफ्फरनगर)। हैदरपुर वेटलैंड में अत्यंत दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजाति के ‘इंडियन ग्रास बर्ड’ की मौजूदगी से पक्षी प्रेमियों के चेहरे खिले हुए हैं। स्वभाव से शर्मिला यह पक्षी नदियों के किनारे छिपकर रहता है, जो प्रजनन काल से ठीक पहले केवल दुनिया के चुनिंदा और बेहद सुरक्षित तराई घास के मैदानों में ही घोंसले बनाता है।
वेटलैंड में इस पक्षी के लिए सुरक्षित दायरा घट रहा है, जिससे इसके जीवन पर खतरा मंडरा रहा है। इसको लेकर पक्षी प्रेमी चिंतित हैं। इस पक्षी की अठखेलियां निहारने के लिए अमेरिका के बर्ड वाचर चार्ली ने भी अपने कैमरे में कैद की हैं।
रामसर साइट हैदरपुर वेटलैंड की जैव विविधता और आर्द्रभूमि वन्य व जलीय जीवों का बेहतर ठिकाना बन गई है। वेटलैंड में इस समय इंडियन ग्रास बर्ड भी देखने को मिल रही है। बर्ड वाचर आशीष गुर्जर ने इसे क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया है।

उन्होंने बताया कि यह इंडियन ग्रास बर्ड गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे मैदानी घास के मैदानों में मुख्य रूप से पाई जाती है। बाढ़ के दौरान इनके आवास में नुकसान होने के कारण इनकी संख्या पर भी असर पड़ता है।
उन्होंने बताया कि यूएसए, जर्मनी, फ्रांस, नाइजीरिया, आस्ट्रेलिया, जापान समेत कई देशों के बर्ड वाचर इस सुंदर पक्षी को देखने के लिए भारत आते हैं तथा हैदरपुर वेटलैंड में इसकी अच्छी संख्या होने के चलते विदेशी बर्ड वाचर इसे देखते हैं।
वहीं, पक्षी विशेषज्ञ आशीष लोया बताते हैं कि संरक्षण के लिहाज से यह पक्षी बेहद शर्मीला माना जाता है। यह निचले इलाकों के तराई वाले नम घास के मैदान, सरकंडों और नदियों के किनारे घने घास के बीच छिपकर रहता है। इनका प्रजनन मानसून के दौरान जुलाई और अगस्त में होता है। इससे पहले यह घास के रेशों से एक गहरा घोंसला बनाता है।
उन्होंने बताया कि जिस तरह से ग्रासलैंड का दायरा सिकुड रहा है और वन विभाग द्वारा झाड़ी और सरकंडें वाले क्षत्रों में पौधारोपण कराया जा रहा है। उस गतिविधि से पक्षियों के सुरक्षित दायरा प्रभावित हो रहा है। जिसको लेकर उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए ऐसे ग्रासलैंड में पौधारोपण पर रोक लगाने की मांग की है।
इंडियन ग्रास बर्ड देखने अमेरिका से आए
बर्ड वाचर आशीष गुर्जर ने बताया कि अमेरिका के विख्यात बर्ड वाचर चार्ली डेविस अपनी फोटोग्राफी के लिए विख्यात है। उन्होंने बताया कि चार्ली डेविस दिल्ली के बर्ड वाचर सरजीत के साथ हैदरपुर वेटलैंड पहंचे तथा आशीष गुर्जर को साथ लेकर वेटलैंड में इंडियन ग्रास बर्ड को निहारा और उसकी अठखेलियों को कैमरे में कैद किए। उन्होंने हैदरपुर वेटलैंड में इस पक्षी की मौजूदगी को देखकर विदेशी पर्यटकों की आवक बढ़ने का अनुमान जताया है।
