मुजफ्फरनगर : नियम तो सही, पर जुर्माना कम हो

ग‌र्ल्स डिग्री कालेज के प्रबंधक डॉ. हरपाल सिंह पंवार ने कहा कि अधिकांश बिना लाइसेंस के चलते हैं। ट्रैक्टर चालक तो नियमों तक नहीं पता है। पहले उन्हें जागरुक किया जाए। नियमों में सख्ती तो सही है, लेकिन जुर्माना इतना किया जाए कि हर व्यक्ति उसको अदा कर सके। अधिक जुर्माना बढ़ाने का कोई तुक नहीं है। हेलमेट खरीदने की रसीद दे पुलिस

दिव्या सामाजिक संस्था के सचिव अमित कुमार ने कहा कि कानून का पालन होना चाहिए। उल्लंघन करने वालों को ऐसी सजा मिले, जिसका उस पर अतिरिक्त बोझ न बढ़ सके। पुलिस चालान के स्थान पर हेलमेट खरीदने की रसीद दे, ताकि लोगों को जागरुकता के साथ खुद ही नियम समझने की आदत बन जाए। जुर्माना पर पुनर्विचार करे सरकार

आंदोलनकारी मास्टर विजय सिंह ने कहा कि जुर्माना बढ़ने पर भी नियमों का पालन होगा, यह तर्कसंगत नहीं है। पुराने जुर्माने को ही रखकर नियमों की नियमित जांच होती तो सुधार की गुंजाइश अधिक बढ़ती। आर्थिक मंदी के दौर में कई गुना जुर्माना राशि बढ़ाया जाना सही नहीं ठहराया जा सकता है। सरकार को इस मसले पुनर्विचार करना चाहिए। बिना हेलमेट सवारों को न मिले प्रवेश

चौ. छोटूराम इंटर कॉलेज के शिक्षक संजीव कुमार जावला ने कहा कि नियमों का पालन कराने की आड़ में अवैध खेल भी होता है। अधिकारियों को चाहिए कि वह लिक मार्ग, शहर के एंट्री प्वाइंट पर ही वाहन सवारों की जांच करें और बिना हेलमेट दुपहिया सवारों के प्रवेश पर रोक लगा दे। हालांकि पहली बार पकड़े जाने पर उसे माफी का एक मौका जरुर दिया जाए। सड़क, जाम भी नहीं होनी चाहिए

शिक्षक डॉ. अनुज कुमार ने कहा कि नियम तो जरुरी है। पहली बार पकड़े जाने पर जुर्माना कम हो। हालांकि सरकार को पहले शहरों के जाम, सड़कों में भी सुधार लाना चाहिए। जुर्माना देने वाले लोग बिना जाम, असुविधा सड़क पर नहीं चलना पसंद करेगा। ट्रैफिक विभाग अपनी व्यवस्थाओं में भी सुधार लाए। हमें मानसिकता बदलनी होगी

समाजसेवी रामपाल मांडी ने कहा कि हर व्यक्ति को मानसिकता बदलनी होगी। सरकार का कदम स्वागत योग्य है। पुलिस चेकिग के नाम पर किसी को परेशान नहीं करे। ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई होनी चाहिए। नियम तो सहीं है, मगर जुर्माना कम ही रखना चाहिए था। देशहित में उठाया नया कदम

समाजसेवी नेमपाल प्रजापति ने कहा कि विश्व में सिगापुर देश ऐसा है, जहां शत-प्रतिशत यातायात नियमों का पालन होता है, क्योंकि वहां जुर्माना राशि अधिक है। नियमों को लेकर बने भय को अधिकारी नागरिकों को समझाएं। सरकार का यह कदम देशहित में उठाया गया है। नाबालिगों को वाहन न दें अभिभावक

नूर फाउंडेशन की अध्यक्ष रागिनी छाबड़ा ने कहा कि सरकार का यह बेहतर कदम है। शुरुआती दौर में दो से तीन माह तक सख्ती अधिक रहती है, उसके बाद माहौल के अनुसार बदलाव आता है। अभिभावक अपने नाबालिग बच्चों को वाहन न दें। पहले उन्हें यातायात के नियमों की बारीकी से जानकारी दें। पहले जागरुकता कार्यक्रम होने चाहिए

जिला योग एसोसिएशन की अध्यक्षा समृद्धि त्यागी ने कहा कि यातायात नियमों में संशोधन जल्दबाजी में किया गया है। पहले इसके लिए प्रशासन, पुलिस को तैयार किया जाना था। लोगों को जागरुकता लानी चाहिए थी। शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को अभी पूर्ण जानकारी नहीं होगी। साकारात्मक पहल जरुरी, गति पर लगे ब्रेक

समाजसेवी बिजेंद्र पाल ने कहा कि यातायात के नियमों की जानकारी के लिए स्कूल, कॉलेजों में कार्यशालाएं होनी जरुरी हैं। इसके लिए साकारात्मक पहल होनी चाहिए। शहर में वाहनों की गति पर ब्रेक लगना चाहिए। हेलमेट, लाइसेंस की नियमित चेकिग होनी चाहिए। प्रशासन को लचीला बनना होगा

समाजसेवी संजीव कुमार ने कहा कि प्रशासन नियमों का पालन कराने के लिए सख्त कदम उठा रहा है। नाबालिग बच्चों को वाहन नहीं दिया जाना चाहिए। इससे पहले जनजागरण अभियान चलाना चाहिए। ट्रैफिक विभाग संसाधनों, मैन पॉवर को बढ़ाने पर भी जोर दें और अधिकारियों को लोगों के लिए लचीला होना चाहिए। लोगों की सुविधा को बने नियम

समाजसेवी वेदपाल सिंह ने कहा कि यातायात के नियम लोगों की सुविधा के लिए बनाए गए है। इनका पालन अवश्य है। अधिकारियों को भी लोग पहले समझाएं उन्हें जागरुक करें।

Posted By: Jagran

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