NCC कैडेट ने दसवीं कोशिश में पहनी सेना की वर्दी, लेफ्टिनेंट बन साकार किया दादा का सपना
मुजफ्फरनगर के प्रियवृत सिंह ने नौ बार असफल होने के बाद दसवीं कोशिश में भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर अपने ...और पढ़ें

चेन्नई में आयोजित पासिंग आउट परेड में अपने दादा केपी सिंह, दादी शमशेरवती, पिता विपिन व मां अनिता देवी के साथ लेफ्टिनेंट प्रियवृत सिंह: सौ. एनसीसी
HighLights
प्रियवृत सिंह नौ बार असफल होकर दसवीं में बने लेफ्टिनेंट।
एनसीसी कैडेट ने भारतीय सेना में अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।
दादा-दादी ने पोते के कंधों पर लगाए लेफ्टिनेंट के रैंक।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरनगर। उठो और देखो इस सुनहरे सवेर को, आज फिर तुम्हें अपनी राह बनानी है... इन पंक्तियों को ककरौली क्षेत्र के गांव बेहड़ा सादात निवासी प्रियवृत सिंह ने अपनी मेहनत और हौसले से चरितार्थ किया है।
एनसीसी की राह पकड़कर भारतीय सेना में अधिकारी बनने का सपना देखा और लगातार नौ बार साक्षात्कार में असफल होने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी। दसवीं कोशिश में सफलता हासिल कर प्रियवृत सिंह भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन गए।
82 यूपी बटालियन एनसीसी के सीनियर डिवीजन के एनसीसी कैडेट रहे प्रियवृत सिंह ने चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में आयोजित पासिंग आउट परेड में सैन्य अधिकारी के रूप में कदम रखा।
गरिमापूर्ण सैन्य परंपराओं के बीच आयोजित परेड में नवनियुक्त अधिकारियों ने राष्ट्रसेवा की शपथ ली और भारतीय सेना की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। 82 यूपी बटालियन एनसीसी के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल प्रवीण भाल ने प्रियवृत की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की।
दादा-दादी ने कंधों पर लगाए लेफ्टिनेंट के रैंक
प्रियवृत के लिए यह पल उस समय और भी भावुक और गौरवपूर्ण हो गया, जब उनके दादा एवं महर्षि शुकदेव इंटर कालेज के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य कृष्णपाल सिंह, दादी शमशेरवती, माता अनीता और पिता विपिन सिंह ने उनके कंधों पर लेफ्टिनेंट के रैंक लगाए। दादा ने कहा कि उनका सपना था कि उनका पोता प्रियवृत एक दिन भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने। पोते ने उनकी यह इच्छा पूरी कर दी।
नौ बार मिली असफलता, फिर भी नहीं टूटा हौसला
प्रियवृत सिंह की सफलता के पीछे लंबा संघर्ष छिपा है। वर्ष 2019 में दिल्ली पब्लिक स्कूल रुड़की से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने एसडी डिग्री कालेज से वर्ष 2023 में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। सेना में अधिकारी बनने के लक्ष्य के साथ उन्होंने एनसीसी को अपना आधार बनाया और कड़ी मेहनत कर सी प्रमाण पत्र हासिल किया।
एनसीसी के माध्यम से सेना में अधिकारी बनने के लिए उन्होंने अलग-अलग श्रेणियों में लगातार प्रयास किए। देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित एसएसबी साक्षात्कार के लिए वह नौ बार पहुंचे, लेकिन हर बार सफलता हाथ नहीं लगी। असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी कमियों को दूर करते हुए तैयारी जारी रखी।
मई 2025 में उन्होंने प्रयागराज में एसएसबी के माध्यम से दसवीं बार साक्षात्कार दिया। इस बार उनकी मेहनत रंग लाई और करीब 70 युवाओं के साथ उनका भी चयन हुआ। इसके बाद चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में प्रशिक्षण पूरा कर उन्होंने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त किया।
