स्कूल बिल्डिंग नीलाम, सिस्टम नाकाम! मुजफ्फरनगर में एक कमरे में बैठ रहे तीन कक्षाओं के बच्चे... कब बनेगा नया भवन?
Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर के मोरना विकासखंड के जौली गांव में उच्च प्राथमिक विद्यालय का जर्जर भवन एक साल पहले नीलाम ...और पढ़ें

मुजफ्फरनगर के जौली गांव के स्कूल के एक कक्ष में बैठे कक्षा छह, सात और आठ के विद्यार्थी। जागरण
HighLights
गांव जौली में जर्जर भवन की एक साल पहले हो चुकी नीलामी।
एक साल बाद भी नए भवन का निर्माण नहीं हो पाया।
तीन कक्षाओं के 40 छात्र एक ही कमरे में पढ़ने को मजबूर।
रोहिताश्व कुमार वर्मा, मोरना (मुजफ्फरनगर)। शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के दावों के बीच मोरना विकासखंड के गांव जौली में नौनिहालों की पढ़ाई एक कमरे में सिमटकर रह गई है।

गांव जौली में स्कूल के कक्ष का गेट, इसी में पढ़ रहे हैं तीन कक्षाओं के विद्यार्थी। जागरण
उच्च प्राथमिक विद्यालय का जर्जर भवन एक साल पहले नीलाम कर दिया गया, लेकिन अब तक नए भवन का निर्माण नहीं हो सका है। ऐसे में कक्षा छह, सात और आठ के 40 विद्यार्थियों की पढ़ाई प्राथमिक विद्यालय के एक कमरे में कराई जा रही है। तीन कक्षाओं के अलग-अलग पाठ्यक्रम और सीमित स्थान के बीच शिक्षकों के लिए पढ़ाना और बच्चों के लिए पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना चुनौती बना हुआ है।
नीलामी हुई, लेकिन नहीं मिला वैकल्पिक भवन
गांव जौली स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय का भवन लंबे समय से जर्जर हालत में था। सात अगस्त 2025 को भवन की नीलामी कर दी गई। इसके बाद विद्यालय के संचालन के लिए वैकल्पिक भवन की व्यवस्था नहीं हो सकी। वर्तमान में गंगनहर पार स्थित गांव के प्राथमिक विद्यालय के एक कमरे में उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित किया जा रहा है। दोनों विद्यालयों के बीच करीब 300 मीटर की दूरी है।

जौली में उच्च प्राथमिक विद्यालय के भवन की नीलामी के बाद खाली पड़ा प्लाट। जागरण
एक कमरे में तीन कक्षाएं, कैसे पूरी हो पढ़ाई
प्रधानाध्यापिका अंजुल अग्रवाल, शिक्षिका रुपाली गर्ग और शिक्षक सिद्धार्थ के सामने एक ही कमरे में तीनों कक्षाओं के 40 विद्यार्थियों को पढ़ाने की चुनौती है। कक्षा छह, सात और आठ का पाठ्यक्रम अलग-अलग होने के कारण एक साथ शिक्षण कार्य कराना आसान नहीं है। एक कक्षा को पढ़ाते समय दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में सीमित संसाधनों के बीच बच्चों की पढ़ाई को सुचारु रखना शिक्षकों के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है।
एक साल बाद भी समाधान का इंतजार
ग्राम प्रधान साजिद कुरैशी का कहना है कि जर्जर भवन की नीलामी हुए करीब एक साल हो चुका है, लेकिन अब तक नए भवन की व्यवस्था नहीं हो सकी है। एक कमरे में तीन कक्षाओं का संचालन होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। विद्यालय के लिए नए भवन का निर्माण कराया जाना जरूरी है।
इन्होंने कहा...
“जर्जर भवन की नीलामी के बाद बीएसए के माध्यम से नए भवन के निर्माण की मांग शासन को भेजी गई है। धनराशि आवंटित होने के बाद नए भवन का निर्माण कराया जाएगा।”
ध्यान चंद, खंड शिक्षा अधिकारी, मोरना
