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हलवा-पूरी खाई तो लगा दोबारा मिली जिंदगी, दिल दहलाने वाली है मुजफ्फरनगर में बंधनमुक्त कराए गए श्रमिकों की आपबीती

By Dilshad Ali Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Fri, 26 Jun 2026 02:01 PM (IST)

Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर में बंधनमुक्त कराए गए श्रमिकों को तितावी थाने पर अच्छा भोजन और नए कपड़े मिले, जिससे उन्हें ...और पढ़ें

बंधन मुक्त कराए जाने के बाद भाेजन करते श्रमिक।

बंधन मुक्त कराए जाने के बाद भाेजन करते श्रमिक।

HighLights

  1. श्रमिक की मां बोली, सभी आरोपितों को मिले कड़ी सजा।

  2. स्वजन बोले, अपने बच्चों से मिलने की खो चुके थे उम्मीद

जागरण संवाददाता, मुजफ्फरनगर। तितावी थाने पर गुरुवार को बंधनमुक्त कराए गए श्रमिकों को भोजन कराया गया। श्रमिकों ने लंबे अरसे के बाद स्वच्छ एवं पौष्टिक भोजन किया। हलवा संग पूरी, छोले-आलू की सब्जी के साथ रायता खाकर श्रमिकों ने कहा कि उन्हें इस तरह का भोजन छह माह बाद नसीब हुआ है।

उन्हें चोकर की सूखी रोटी खाने को मिलती थी। वहीं, श्रमिक की मां बोली कि वह अपने पुत्र के मिलने की उम्मीद खो चुके थे। वह उसकी याद में बीमार हो गई थी, लेकिन तीन दिन पहले मुजफ्फरनगर पुलिस के एक फोन काल ने उनकी उम्मीदों को जीवंत कर दिया। कहा कि सभी आरोपितों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

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मुजफ्फरनगर में बंधन मुक्त कराए गए श्रमिक स्वजन के साथ। जागरण

एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि गुरुवार को सभी श्रमिकों और उनके स्वजन को तितावी थाने पर सामूहिक भोजन कराया गया। इसके लिए सीओ फुगाना विश्वजीत सिंह, तितावी थाना प्रभारी प्रमोद कुमार की टीम ने उनके लिए खाना बनवाया। सभी को एक पंडाल में बैठाकर भोजन कराया। श्रमिकों को नए कपड़े पहनाए गए। सामूहिक भोज के बाद श्रमिकों ने कहा कि बंधनमुक्त होने के बाद उन्हें भरपेट खाना मिला है।

फैक्ट्री में उन्हें यातना के साथ चोकर की सूखी रोटी मिलती थी। एक रोटी खाते थे तथा दूसरी रोटी को कमर से बांध लेते थे। उन्हें पुलिस की कार्रवाई के बाद पुन: जीवन मिला है। बिहार के औरैया थाना डिबीयापुर के गांव उथवइया निवासी श्रमिक शिवम कुमार के मां राजरानी ने कहा कि आठ माह पहले उनका बेटा काम करने गया था। इसके बाद उससे कोई संपर्क नहीं हो सका। निरंतर उसकी तलाश की गई, लेकिन सुराग नहीं मिला।

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यातनाएं देने के निशान दिखाते श्रमिक। 

वह उसको याद कर बीमार पड़ गई। तीन दिन पहले मुजफ्फरनगर पुलिस की फोन से उन्हें राहत मिली। बेटे को देखा तो वह इतना कमजोर हो चुका कि एकबारगी पहचान में नहीं आया। बोली कि आरोपितों को मौत की सजा दी जाए। राजस्थान के नेग सिंह ने कहा कि उसका भाई विक्रम बिना बताए हरिद्वार चला गया था। भाई की खूब तलाश की, लेकिन कुछ पता नहीं चला।

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इनके दर्ज कराए गए बयान

सीओ फुगाना विश्वजीत सिंह ने बताया कि गुरुवार को रामू निवासी नैनीताल, मोनू चौहान निवासी आगरा, दिलशाद निवासी अमरोहा, संतोष हेमाराम, शिवम कुमार निवासी औरैया, राजन चौधरी, उज्जवल निवासी बिहार, नारायण निवासी बिलासपुर छत्तीसगढ़, धनबहादुर निवासी नेपाल के मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 183 के तहत बयान दर्ज कराए गए।

सभी श्रमिकों के खुले बैंक खाते

एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि सभी श्रमिकों के बैंक खाते खुलवाए जा रहे हैं। इन खातों में इन्हें पुनर्वास के लिए एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। सभी को मुख्य धारा में लाने के लिए एनजीओ की भी मदद ली जा रही है। छह श्रमिकों के स्वजन आ गए हैं।

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